आनंद कुमार बोले- दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं:टेलीविजन और मोबाइल के दौर में साहस खो रहे स्टूडेंट, मेहनत के बिना सफलता नहीं मिलती

मैथ गुरु और पूरे देश में सुपर-30 फाउंडर के रूप में पहचान बनाने वाले आनंद कुमार रविवार की शाम बिलासपुर पहुंचे। जहां उन्होंने पुलिस ग्राउंड में IIT व NEET की तैयारी के लिए सेमिनार देने आए थे। उन्होंने कहा कि दुनिया में कोई भी चीज असंभव नहीं है। पर उसके लिए मेहनत जरूरी है। बिना मेहनत के सफलता मिल ही नहीं सकती। हां, अगर मेहनत करेंगे तो ऐसी सफलता मिलेगी कि आप कहेंगे कि इससे 10 गुना ज्यादा कठिन लक्ष्य बनाते तो भी उसे हासिल करना आसान होता। यह सिर्फ बात नहीं है। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है।
पिछले 20 साल से IIT, JEE, NEET इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेजों की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले हजारों छात्रों को सफलता दिलाने मे उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। रविवार को पुलिस ग्राउंड में स्टूडेंट्स, पैरेंट्स और शिक्षकों के लिए आयोजित सेमिनार में उन्होंने बताया कि सुपर-30 फिल्म बिल्कुल सच्ची घटना है। इसमें 4 ऐसे कलाकार थे, जो सुपर-30 में पढ़ने वाले बच्चे थे।
लक्ष्य से भटक रहे युवा, मोबाइल और टेलीविजन से डायवर्ट हो रहा दिमाग
आनंद कुमार ने कहा कि, आज के समय में बच्चे तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं। वे करोड़पति के कार्यक्रम और फिल्म देख रहे हैं। इससे उनका दिमाग डायवर्ट हो रहा है। और धैर्य खो रहे हैं। अपने लक्ष्य से भटक जा रहे हैं। युवाओं को यह ध्यान रखना होगा कि धैर्य ही सब कुछ है। इसे खोना नहीं चाहिए, और अपनी लक्ष्य के लिए दिन रात सोचते हुए आगे बढ़ें। सफलता जरूर मिलेगी। जितनी देर से सफलता मिलती है। उसी में स्थायित्व रहता है। तेजी से चलने वाले लोग अक्सर पिछड़ जाते हैं। उन्होंने पैरेंट्स को भी नसीहत देते हुए कहा कि बच्चों की कामयाबी चाहते हैं। तो उन्हें मोबाइल जैसे घातक चीजों से दूर रखें।
हमारी तरह हर इंस्टीट्यूट करे तो कोई भी जरूरतमंद बच्चा पढ़ाई से वंचित नहीं रहेगा
आनंद कुमार देश में शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखते हैं। गरीब बच्चों के लिए शुरू किए गए सुपर-30 प्रोग्राम के जरिए मिसाल कायम करने वाले आनंद कुमार के पढ़ाए 510 बच्चों में से 422 का अब तक आईआईटी में सलेक्शन हो चुका है। बिलासपुर के विंग्स इंस्टीट्यूट के संचालक हेमंत गुप्ता को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने हमें युवाओं के लिए बुलाया। इन्होंने भी 30 गरीब व जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने की शुरुआत की है। उनके रहने, खाने का खर्च भी उठाएंगे, जो अच्छी शुरुआत है। अगर प्रत्येक कोचिंग और स्कूल ऐसी पहल शुरू कर दे, तो छत्तीसगढ़ का कोई भी बच्चा अच्छी पढ़ाई से वंचित नहीं हो सकता है। और देश-विदेश में छत्तीसगढ़ का नाम होगा।
10 साल पहले भी बिलासपुर आए थे आनंद कुमार
रविवार को आनंद कुमार की फ्लाइट कैंसिल होने के कारण देर से बिलासपुर पहुंचे। इसके लिए उन्होंने क्षमा मांगी और बताया कि 10 साल पहले बिलासपुर में बिजली विभाग के कार्यक्रम में आया था, पर छात्र व युवाओं से मुलाकात नहीं हुई थी। इस सेमीनार के विशेष सहयोगी एड प्रयास, डॉ. सीवी रमन यूनिवर्सिटी, एसबीआई, आधारशिला विद्या मंदिर, गुरुकुल आईसीएस, होटल रेड डायमंड था।



