छत्तीसगढ़: रायपुर में जुटे आदिवासी समाज के लोगो ने कहा:,” धर्म बदल चुके आदिवासियों का खतम हो आरक्षण”

रायपुर में रविवार काे VIP रोड स्थित राम मंदिर के बाहर आदिवासी समुदाय के लोगों की भीड़ दिखी। बसों और SUV में भर-भरकर इन्हें लाया जा रहा था। कुछ देर बाद सभी एक जगह पर जमा होने लगे। सिर पर मुर्गे की पंख, रंग बिरंगी पोशाकों को पहने ग्रामीण दिखने लगे। पारंपरिक वाद्य यंत्रों और तीर कमान लेकर भी आदिवासी आने लगे। ये गहमा गहमी रायपुर में शुरू हुए एक आंदोलन की वजह से था

रंग-बिरंगे पोशाक में पहुंचे आदिवासियों ने छोटी रैली निकालकर कार्यक्रम स्थल में शिरकत किए।
रविवार को जनजाति सुरक्षा मंच ने यहां डी लिस्टिंग महारैली का आयोजन किया। VIP चौराहे से गाते-बजाते नारे लगाते सैकड़ों आदिवासी राम मंदिर के सामने बने कार्यक्रम सभा स्थल की ओर बढ़ रहे थे। यहां सभी सभा में शामिल हुए। कार्यक्रम स्थल में भाजपा के आदिवासी नेताओं और पूर्व मंत्रियों का जमावड़ा भी था। आदिवासियों ने हाथों में तख्तियां भी ले रखीं थीं, इन पर लिखा था ये बात वास्तविक है, ST भोले का आस्तिक है। डी लिस्टिंग कानून लागू करना होगा।

सभा के मंच पर लगा डी-लिस्टिंग महारैली का पोस्टर, यहां मौजूद जनजाति वर्ग के नेता।
ऐन मौके पर रैली रोक दी गई
कार्यक्रम की शुरुआत में जनजाति सुरक्षा मंच के प्रांतीय संयोजक भोजराज नाग ने अपने सम्बोधन में कहा- हमारे कार्यक्रम का नाम डी लिस्टिंग महारैली था। मगर ऐन मौके पर प्रशासन ने हमारे कार्यक्रम में रैली की अनुमति हमें नहीं दी। इसके बाद कार्यक्रम को सभा तक समेट दिया गया । नाग इस बात का हवाला देकर मंच से बोले- हमें रैली की परमिशन नहीं दी गई, अरे आदिवासी कोई हिंसावादी उग्रवादी नहीं है। प्रकृति के पूजक हैं। भोले लोग हैं, इसी का फायदा उठाकर षड्यंत्र पूर्वक कभी शिक्षा तो कभी स्वास्थ्य के नाम पर धर्मांतरण हो रहा है जो गलत है।

डी-लिस्टिंग रैली में प्रबल प्रताप जूदेव भी पंडो जनजाति के प्रमुखों के साथ नजर आए।
क्या है डी लिस्टिंग की मांग
- डी लिस्टिंग का मतलब है आरक्षण की सुविधा मिलने वाली लिस्ट से लोगों को हटाना, नए सिरे से लिस्ट को अपडेट करना।
- डी लिस्टिंग की मांग सिर्फ उन आदिवासियों के लिए हो रही है जो धर्म बदलकर, ईसाई या मुस्लिम बन गए।
- डी-लिस्टिंग के लिए संविधान संशोधन ही विकल्प है।
- आर्टिकल 341 में शेड्यूल कास्ट को परिभाषित किया गया है।
- दूसरा धर्म अपनाने वाले को एससी केटेगरी से बाहर करने का प्रावधान है।
- आर्टिकल 342 में अनुसूचित जनजाति को परिभाषित किया गया है।
- दूसरा धर्म अपनाने पर एसटी केटेगरी से बाहर करने का प्रावधान नहीं है।
- जनजाति सुरक्षा मंच इसमें बदलाव चाहता है।
- जनजाति सुरक्षा मंच का मानना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में आदिवासियों का धर्म परिवर्तन हुआ है।

आदिवासियों की रैली में बड़ी संख्या में तख्तियां लेकर शामिल हुए थे लोग।
जो संस्कृति को ही नहीं मानते उन्हें सुविधा क्यों
कार्यक्रम में आए आदिवासी नेताओं ने कहा कि संविधान में आदिवासियों को आरक्षण इसलिए दिया गया ताकि उनकी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा हो सके। धर्म बदलकर कुछ आदिवासी न तो इन परंपराओं को मान रहे, न पूजा पद्धति को न ही संस्कृति को तो ऐसे में उन्हें आदिवासियों की तरह विशेष दर्जा या आरक्षण के फायदे नहीं मिलने चाहिए।
अब आगे क्या
रायपुर में हुई इस सभा में जशपुर, बस्तर, अंबिकापुर, कांकेर जैसे आदिवासी बाहुल इलाकों से ग्रामीण पहुंचे थे। अब तक प्रदेश के ब्लॉक और जिला स्तर पर छोटी रैलियां निकाली जा चुकी हैं। इनमें धर्म बदलने वाले आदिवासियों को आरक्षण का लाभ न देने की मांग की जा चुकी है। अब रायपुर में हुई इस सभा के बाद जनजाति सुरक्षा मंच, RSS, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और सबसे अहम भारतीय जनता पार्टी जैसे संगठन, कानून में संशोधन करने की मांग करेंगे।
आगे चलकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर में भी इसे लेकर विरोध प्रदर्शन किए जाने की तैयारी है। कानून में संशोधन की मांग करते हुए धर्म बदलने वालों को आरक्षण के फायदे न देने के प्रावधान लागू करने केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।



