मदरसों की तरह स्कूलों में धार्मिक शिक्षा की मांग:स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बोले- हिंदूराष्ट्र नहीं रामराज्य चाहिए, जो संत राजनीतिक दलों में वो हिंदू नहीं

रायपुर

ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज शुक्रवार को रायपुर पहुंचे। उन्होंने देश में जारी कई मुद्दों पर खुलकार बात की। हिंदू राष्ट्र के मसले पर कहा कि हम हिंदू राष्ट्र नहीं मांग रहे। हिंदू राष्ट्र तो रावण और कंस के भी थे, मगर प्रजा परेशान थी। सबसे आदर्श कोई राज्य था तो वो था राम राज्य हम राम राज्य की कामना करते हैं।

रायपुर में मीडिया से चर्चा के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
हिंदू राष्ट्र के मसले पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि इसकी बात करने वालांे ने कोई प्रारूप ही नहीं बताया है। ये तय नहीं है कि हिंदू राष्ट्र का प्रारूप कैसा होगा, इससे हमारे जीवन में क्या बदलाव आएंगे ताे इस वजह से जब पता ही नहीं है कि इसमें क्या होगा न हम इसका समर्थन करते हैं न विरोध करते हैं।
स्कूल में पढ़ाया जाने वाला इतिहास बदला गया
NCERT की किताबों में मुगलों के चैप्टर हटाए जाने पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि पहले के समय में हमने हमारे राजाओं को छोड़ केवल मुगल-मुगल पढ़ाया। अब वो पूरी तरह से हटा देना उतना ही गलत है जितना की पहले सिर्फ मुगल-मुगल पढ़ाना था। हम पढ़ने जा रहे हैं हिस्ट्री और सिलेक्टिव हो जाएं कि ये तो नहीं पढ़ेंगे ये ठीक नहीं है। इतिहास के मामले में तो तठस्थ रहना होगा कि जो जैसा है उसे वैसा ही पढ़ाया जाए। मगर यदि इसके पीछे ये सोच है कि हमारे बच्चे हिंदू राजाओं के बारे में जाने यह उनके काम की बात है मुगलों से क्या लेना-देना तो फिर ठीक है, मगर यदि हम इतिहास पढ़ रहे हैं तब तो जो जैसा है उसे वैसा ही पढ़ाएं यही सही होगा।
स्कूलों में हो हिंदू धर्म की शिक्षा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए। मदरसे में अगर धार्मिक पढ़ाई हो सकती है तो, स्कूलों में हिंदू धर्म की पढ़ाई क्यों नहीं हो सकती। ईसाई मिशनरी वाले स्कूलों में प्रेयर हो सकती है। हिंदू खतरे में है कहा जाता है हिंदू खतरे में तब होगा जब वो अपने धर्म से दूर जाएगा। स्कूलों में बताया ही नहीं जाता कि आचमन कैसे होगा आरती कैसे होगी, संविधान में कहा गया है कि बहूसंख्यक समाज अपनी धार्मिक शिक्षा स्कूलाें में नहीं दे सकते तो पहले तो इसे बदलना होगा।
साईं भगवान नहीं इस बात का समर्थन
बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि साईं बाबा भगवान नहीं हैं। इस बयान का स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने समर्थन किया। उन्हाेंने कहा कि धीरेंद्र कृष्ण के बयान को हमने देखा है उन्होंने शंकराचार्य जी का उल्लेख करते हुए कहा है, शंकराचार्य इस देश में धर्म के प्रधानमंत्री है उन्होंने जो कहा उसका पालन हिंदू समाज नहीं करेगा तो कौन करेगा। उन्होंने कहा था साईं बाबा के बारे में इस वजह हम समर्थन करते हैं।
राजनीतिक दल से जो ताल्लुक रखे वो संत हिंदू नहीं
देश में कई संत है जो राजनीतिक दलों से संबंध रखते हैं, यूपी के CM योगी आदित्यनाथ भी। संतों के राजनीतिक दलों से जुड़ाव के मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बिना किसी का नाम लिए एक बड़ा बयान रायपुर में दिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल इस शपथ के साथ काम करते हैं कि वो धर्मनिरपेक्ष होंगे। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस या कोई भी राजनीतिक दल, तो जो कोई भी संत महात्मा चाहे कितने ही बड़े पद पर हो जब राजनीतिक दज में चला जाता है तो वो तो हिंदू भी नहीं रह जाता। वो धार्मिक नहीं रह जाता। वो तो धर्मनिरपेक्ष हो गया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य थे।
जानिए कौन हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद उनके उत्तराधिकारी घोषित किए गए थे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ और स्वामी सदानंद को द्वारका शारदा पीठ का प्रमुख बनाया गया था। उनके नामों की घोषणा शंकराचार्य जी की पार्थिव देह के सामने की गई थी।
15 अगस्त 1969 को जन्मे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बचपन में नाम उमाशंकर पांडे था। कक्षा 6 तक की पढ़ाई गांव में करने के बाद घरवालों ने उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए बाहर भेज दिया। एक बार उनके पिता उन्हें गुजरात ले गए वहां वे काशी के संत रामचैतन्य से मिले। उन्होंने बेटे को वहीं छोड़ दिया। यहीं पर रहकर उमाशंकर पूजन पाठ और पढ़ाई करने लगे।
5 साल तक गुजरात में रहकर पढ़ाई करने के बाद उमाशंकर काशी पहुंचे। काशी में उनकी मुलाकात स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से हुई। इसके बाद उन्होंने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। साल 2000 में उन्होंने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से दीक्षा ली और उनके शिष्य बन गए। फिर उमाशंकर पांडे से वह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बन गए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 4 जून 2022 को ज्ञानवापी परिसर में पूजा का ऐलान किया था। पुलिस प्रशासन की तरफ से रोके जाने के बाद वे 108 घंटे तक अनशन पर रहे। उसके बाद जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के कहने पर उन्होंने अनशन खत्म किया था।



