Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ बंद को लेकर चैंबर में दो गुट :चैंबर ऑफ कॉमर्स ने बंद को समर्थन नहीं देने पर भी कई पदाधिकारियों ने दुकानें बंद करवाई

रायपुर: बेमेतरा में हुई हत्या और साम्प्रदायिक हिंसा के मामले में 10 अप्रैल को छत्तीसगढ़ बंद रहा। चैंबर ऑफ कॉमर्स ने बंद को भले ही अपना समर्थन नहीं दिया लेकिन संगठन से जुड़े कई पदाधिकारियों ने अपने जिले और संंभागों में पेट्रोल पंप, शो रूम और दुकानें बंद कराकर खुलकर अपना समर्थन दिया।

प्रदेश के सभी जिलों में बंद के असर को देखते हुए अब वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। इस मुद्दे को लेकर चैंबर में दो फाड़ दिखाई दे रहा है। विश्व हिन्दू परिषद द्वारा बुलाए गए इस बंद के समर्थन में चैंबर के पूर्व पदाधिकारी और बीजेपी से जुड़े नेता शहर को बंद कराते दिखाई दिये।

चेंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी सुबह से ही बंद कराने पहुंचे थे।

चेंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी सुबह से ही बंद कराने पहुंचे थे।

जिनमें चैम्बर के अध्यक्ष और पूर्व विधायक श्रीचंद सुन्दरानी, पूर्व चेयरमैन योगेश अग्रवाल, पूर्व उपाध्यक्ष राजकुमार राठी और राजेश वासवानी जैसे कई नेता शामिल थे। उन्होंने इस मामले में चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

श्रीचंद सुंदरानी ने चैंबर अध्यक्ष पर सरकार की चाटूकारिता करने का आरोप लगाया है।

श्रीचंद सुंदरानी ने चैंबर अध्यक्ष पर सरकार की चाटूकारिता करने का आरोप लगाया है।

श्रीचंद सुन्दरानी ने कहा की चैम्बर का व्यवहार बंद के प्रति अशोभनीय था। 50 सालों का इतिहास रहा है की जब भी जनहित का मुद्दा होता है, तब चैंबर बंद को समर्थन देती है। बेमेतरा का मुद्दा भी संवेदनशील था लेकिन इस मुद्दे में बंद को समर्थन ना देकर चैम्बर की 50 साल में जो छवि बनी थी उसे चैम्बर अध्यक्ष द्वारा आघात पहुंचाने का काम किया गया।

सुंदरानी में अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि जब प्रदेश में रमन सरकार की और मैं चेंबर ऑफ कॉमर्स का अध्यक्ष था तब कई जनहित के मामलों में बंद का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने बताया कि चैंबर के कई पदाधिकारियों ने भी अपने जिले और संभाग में बंद को अपना समर्थन दिया है। महामंत्री अजय भसीन ने खुद दुर्ग संभाग बंद कराया। इसके अलावा दूसरे जिलों के पदाधिकारियों ने भी अपना समर्थन दिया लेकिन चैंबर के वर्तमान अध्यक्ष समेत कुछ पदाधिकारियों मे सरकार की चाटूकारिता के चलते बंद को समर्थन नहीं दिया।

अध्यक्ष अमर परवानी ने कहा 24 घंटे से भी कम समय में बंद के लिए समर्थन मांगा गया इसलिए चैंबर अनिर्णय की स्थिति में रहा।

अध्यक्ष अमर परवानी ने कहा 24 घंटे से भी कम समय में बंद के लिए समर्थन मांगा गया इसलिए चैंबर अनिर्णय की स्थिति में रहा।

बंद को समर्थन नहीं देने पर चैंबर की दलील

बेमेतरा की घटना लेकर बंद को लेकर चैंबर अध्यक्ष अमर परवानी की तरफ से जारी किये गये आधिकारिक बयान में कहा गया कि इस घटना के बाद विश्व हिंदू परिषद ने 10 अप्रैल को छत्तीसगढ़ बंद की अपील की, जिसका समर्थन चैंबर आफ कॉमर्स से मांगा गया। चैंबर के प्रावधानों के अंतर्गत बंद के समर्थन के लिए कम से कम 72 घंटे के अंतर्गत पूर्व सूचना पर कार्यकारिणी और व्यापारी संगठनों के पदाधिकारियों की विशेष बैठक आमंत्रित की जाती है, जिसके बाद बंद पर निर्णय लिया जाता है। क्योंकि विश्व हिंदू परिषद् ने 24 घंटे से भी कम समय में बंद के लिए समर्थन मांगा है, लिहाजा चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज अभी अनिर्णय की स्थिति में रहा। हांलाकि घटना को दुखद बताते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग चैंबर ने की है।

सुंदरानी पर पलटवार

चैंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यकारी अध्यक्ष राजेन्द्र जग्गी ने श्रीचंद सुंदरानी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि व्यापारियों को संरक्षण देना और सरकार के बीच सेतु का काम चेंबर ऑफ कॉमर्स करती है। बंद को लेकर व्यापारिक संगठनों और पदाधिकारियों की सहमति के बाद ही कोई फैसला लिया जाता है। उन्होंने कहा कि श्रीचंद सुंदरानी को व्यापारियों ने नकार दिया है। बीजेपी में भी उनकी पूछ-परख बंद हो गयी है और अब पार्टी में अपना नंबर बढ़ाने के लिए सुंदरानी इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। इसलिए उनके इस बयान को तवज्जो नहीं देना चाहिए ।

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Manish Tiwari

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