Chhattisgarh

पहली बार… कुरुद, लोहारा और नगरी समेत 14 छोटे शहरों का मास्टर प्लान

छत्तीसगढ़ में जिस तरह राजधानी समेत बड़े शहरों का विकास मास्टर प्लान के आधार पर होता है, वैसे ही प्लान अब नगर पंचायत जैसे छोटे शहरों के लिए भी बन गए हैं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने पहली बार 14 छोटे शहरों का मास्टर प्लान तैयार किया है। इनमें नगरी, कुरुद, सहसपुर-लोहारा और पिथौरा जैसे शहर शामिल हैं। इन सभी के मास्टर प्लान का नोटिफिकेशन (अधिसूचना) मई के अंत तक किया जाएगा।

इन्हें मिलाकर प्रदेश के 56 छोटे-बड़े शहरों का मास्टर प्लान बन गया है। दरअसल प्रदेश के सभी नगरीय निकायों तथा नए जिलों के सुनियोजित विकास के लिए राज्य सरकार मास्टर प्लान तैयार कर रही है। प्रदेश के अधिकांश शहरों का मास्टर प्लान 2011 में जारी किया गया था।

इसके बाद यह प्लान 2021 में जारी होना था लेकिन अभी तक अलग-अलग कारणों से मास्टर प्लान में दो साल की देरी हो चुकी है। इसलिए मास्टर प्लान का खाका अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से 2031 के शहरों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

बुनियादी जरूरतों के साथ सुविधाओं का भी ध्यान
जिन छोटे शहरों का मास्टर प्लान बन गया है, उनमें नगरी, धमतरी, कुरुद, सहसपुर-लोहारा, पिथौरा, अकलतरा, लखनपुर, सूरजपुर, तिल्दा-नेवरा, डोंगरगांव, दीपका, सुकमा, दंतेवाड़ा आैर पखांजुर शामिल हैं। यहां के प्लान भी निवासियों की जरूरत पर आधारित हैं। यही नहीं, अन्य सुविधाओं जैसे आमोद-प्रमोद, पार्किंग, व्यापारिक गतिविधियां, औद्योगिक और आवासीय प्रयोजन पर भी खास ध्यान दिया गया है।

आउटर और एमआर रोड पर आपत्तियां
अफसरों का कहना है कि शहर के बढ़ते दायरे को ध्यान में रखकर आउटर में बनाई जाने वाले मास्टर रोड़ को लेकर भी कई जगह से आपत्तियां दर्ज कराई गई थी लेकिन जब उन आपत्तियों की सुनवाई की गई तो कुछ जगह लोगों ने मास्टर रोड़ को स्वीकार किया तो कहीं पर थोड़ा बहुत बदलाव कर उसे जारी किया जा रहा है। दरसअल लोगों का कहना था कि मास्टर रोड वहां बननी चाहिए जहां रास्ता क्लीयर है या जहां सरकारी जमीन है।

गलत खसरे, जीआईएस मैपिंग, वनभूमि में कानूनी दिक्कतें
शहरी और मैदानी इलाकों के अलावा टाउन प्लानिंग ने वन क्षेत्रों के किनारे के शहरों का भी मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। दावा-आपत्तियों की सुनवाई भी पूरी की जा चुकी है। इन क्षेत्रों में छठवीं अनुसूची के तहत पेसा कानून लागू है। आपत्तियां वनभूमि को लेकर ज्यादा हैं, इसलिए ऐसे प्लान शासन के पास विचाराधीन है। इसके अलावा, जीआईएस मैपिंग के सहारे तैयार किए गए मास्टर प्लान में सैटेलाइट से पानी से भरा एरिया या बड़ा तालाब खेल मैदान जैसा नजर आ गया है। इसलिए कुछ इलाकों में इसे लेकर काफी आपत्तियां आई हैं। इन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। अफसरों ने बताया कि अधिकांश शहरों में खसरा नंबरों को लेकर भी आपत्ति है, क्योंकि कई स्थानों पर खसरा नंबर और जमीन मालिकों के नाम अलग-अलग दिखाई दे रहे थे। इसे लेकर भी विभागीय अफसरों को काफी माथा-पच्ची करनी पड़ी। इसके लिए तहसील और कलेक्टारेट से भी जमीन के रिकार्ड मंगाए गए हैं।

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Manish Tiwari

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