वेदांता पावर प्लांट हादसा अपडेट: मृतकों की संख्या बढ़कर 20, प्रशासन ने शुरू की मजिस्ट्रियल जांच

सक्ती (छत्तीसगढ़), 16 अप्रैल 2026।
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट ने बड़े औद्योगिक हादसे का रूप ले लिया है। हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 15 घायल श्रमिकों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार मृतकों में छत्तीसगढ़ के 5 श्रमिक शामिल हैं, जबकि 15 मजदूर अन्य राज्यों से थे। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और दहशत का माहौल है।
घायलों का इलाज, एयर एंबुलेंस स्टैंडबाय
घटना के बाद राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। गंभीर रूप से घायल मरीजों के बेहतर इलाज के लिए 5 एयर एंबुलेंस को स्टैंडबाय पर रखा गया है। प्रशासन ने आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को हैदराबाद के सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में रेफर करने के लिए भी तैयारी कर ली है।
जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कलेक्टर और एसपी ने घटनास्थल का निरीक्षण कर राहत कार्यों की समीक्षा की है।
शव गृहग्राम भेजने की प्रक्रिया जारी
मृतकों के शवों को एंबुलेंस के माध्यम से उनके गृहग्राम भेजा जा रहा है। छत्तीसगढ़ के मृतकों में से कुछ का अंतिम संस्कार स्थानीय स्तर पर किया जा चुका है, जबकि अन्य राज्यों के शवों को भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। हादसे के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि लापरवाही या तकनीकी खामी का पता लगाया जा सके।
मुआवजे और सहायता की घोषणा
कंपनी प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की है। वहीं घायल श्रमिकों को 15-15 लाख रुपये देने का ऐलान किया गया है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये सहायता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि घटना के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जांच जारी, कारणों की तलाश
प्रशासन और तकनीकी टीम हादसे के कारणों की जांच में जुटी हुई है। प्रारंभिक तौर पर बॉयलर में तकनीकी खराबी या दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही होगी।
यह हादसा राज्य के औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।



