संसद में 3 संशोधन विधेयक पेश : महिला आरक्षण को लेकर सियासी संग्राम तेज, विपक्ष ने उठाए सवाल

नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2026।
संसद के विशेष सत्र में बुधवार को महिला आरक्षण से जुड़े तीन अहम संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किए गए, जिसके बाद सदन में जमकर हंगामा देखने को मिला। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े संशोधन बिल और परिसीमन विधेयक सदन में पेश किया। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े संशोधन बिल को प्रस्तुत किया।
सरकार का कहना है कि इन विधेयकों का उद्देश्य पहले से पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को पूरी तरह लागू करना है, जिससे लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
विपक्ष का तीखा विरोध, कांग्रेस और सपा ने उठाए सवाल
विधेयक पेश होते ही विपक्षी दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार संविधान के ढांचे को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने बिल को वापस लेने की मांग की।
वहीं समाजवादी पार्टी ने भी विधेयक पर आपत्ति जताई। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि जब तक पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं को स्पष्ट भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक इस बिल का विरोध जारी रहेगा।
सदन में नारेबाजी, कार्यवाही बाधित
विपक्षी दलों के विरोध और नारेबाजी के कारण लोकसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। हंगामे के बीच ही विधेयक को पेश किया गया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
अमित शाह का बयान
गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में कहा कि सरकार जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना भी नियमानुसार की जाएगी और इस पर किसी तरह का भ्रम फैलाया जा रहा है।
चर्चा के लिए लंबा समय तय
सरकार ने इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर विस्तार से चर्चा के लिए लोकसभा में 18 घंटे और राज्यसभा में 10 घंटे का समय निर्धारित किया है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस चर्चा में हस्तक्षेप कर सकते हैं।
सियासी माहौल गरमाया
महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर संसद से सड़क तक सियासी माहौल गर्म हो गया है। विपक्ष जहां इसे संवैधानिक और सामाजिक संतुलन से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, वहीं सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की ऐतिहासिक पहल करार दे रही है।



