सरेंडर कर चुके नक्सलियों को राहत की तैयारी: केस वापसी के लिए बनेगी कमेटी, 1 करोड़ के इनामी पर फंसा कानूनी पेंच

रायपुर, 13 अप्रैल 2026/ छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा उन्मूलन अभियान के तहत आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों के मामलों को वापस लेने की दिशा में सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके लिए जल्द ही एक विशेष कमेटी गठित की जाएगी, जो तय करेगी कि किन मामलों में राहत दी जा सकती है।
राज्य में अब तक करीब 2,900 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इनमें रामधर और पापाराव जैसे कुख्यात नक्सली भी शामिल हैं, जिन पर 25 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित था। हालांकि, इन पर हत्या, लूट, IED विस्फोट और बम बनाने जैसे गंभीर अपराध दर्ज हैं, जिससे केस वापसी में कानूनी अड़चनें सामने आ रही हैं।
कानूनी सलाह ले रही सरकार
इस जटिल स्थिति से निपटने के लिए सरकार कानूनी विशेषज्ञों से राय ले रही है। गृह विभाग के अनुसार, कमेटी की अनुशंसा के आधार पर ही आगे निर्णय लिया जाएगा। हालांकि इस मुद्दे पर पुलिस महानिदेशक ने फिलहाल टिप्पणी करने से इनकार किया है।
पुनर्वास में आ रही दिक्कत
पुनर्वास नीति के तहत कई पूर्व माओवादियों को हर महीने 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जबकि कुछ को सरकारी नौकरी भी मिली है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक उनके खिलाफ दर्ज केस वापस नहीं होंगे, तब तक उन्हें पूरी तरह मुख्यधारा में शामिल करना मुश्किल है।
असंतोष बढ़ने का खतरा
सरकार का मानना है कि यदि केस वापस नहीं हुए तो आत्मसमर्पित माओवादियों में असंतोष बढ़ सकता है। इसी वजह से उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
उपसमिति भी कर रही काम
इस पूरे मामले की निगरानी के लिए गृह मंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में एक उपसमिति भी बनाई गई है। वहीं राज्य की जेलों में करीब 3,000 माओवादी और उनके समर्थक बंद हैं, जिनमें अच्छे आचरण वाले कैदियों की रिहाई पर भी विचार किया जा रहा है।



