जाति प्रमाणपत्र जांच में देरी पर हाईकोर्ट सख्त : BJP विधायक रामकुमार टोप्पो मामले में प्रशासन को तय समयसीमा में फैसला देने का निर्देश

सरगुजा। सीतापुर से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाणपत्र विवाद मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए 90 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने रायगढ़ कलेक्टर और जिला स्तरीय सत्यापन समिति को तय समयसीमा में जांच पूरी करने को कहा है।
याचिकाकर्ता बिहारी लाल तिर्की ने आरोप लगाया है कि प्रशासन इस मामले की सुनवाई को लंबे समय से टाल रहा था, जिसके कारण उन्हें न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
2023 से लंबित है मामला
याचिकाकर्ता ने वर्ष 2023 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाणपत्र पर आपत्ति दर्ज कराई थी। यह प्रमाणपत्र 19 सितंबर 2023 को रायगढ़ से जारी हुआ था।
शिकायत जिला स्तरीय छानबीन समिति के समक्ष भी रखी गई थी, लेकिन करीब 2 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।
“जानबूझकर जांच में देरी” का आरोप
बिहारी लाल तिर्की का आरोप है कि जिला प्रशासन द्वारा जानबूझकर मामले को लंबित रखा गया, जिससे जांच प्रभावित हुई। इसी वजह से उन्हें दूसरी बार हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
कोर्ट का निर्देश
न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच में अब और देरी स्वीकार नहीं होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 90 दिनों के भीतर जांच पूरी कर अंतिम फैसला दिया जाए।
जाति प्रमाणपत्र पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता का दावा है कि जाति प्रमाणपत्र बनाने में नियमों की अनदेखी हुई है। उनका कहना है कि यह प्रमाणपत्र बिना उचित सेटलमेंट और प्रक्रिया के जारी किया गया।
उनके अनुसार विधायक के पिता वर्ष 1980 में झारखंड से छत्तीसगढ़ आए थे, और स्थानीय स्तर पर जमीन रिकॉर्ड संबंधी दस्तावेज भी स्पष्ट नहीं हैं।
मामला अब हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद फिर से जांच के दायरे में आ गया है, और 90 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय अनिवार्य होगा।



