
रायपुर। छत्तीसगढ़ में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन पीड़ितों को न्याय और राहत मिलना मुश्किल हो गया है। साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 8600 शिकायतों में से केवल 190 मामलों में ही एफआईआर दर्ज हुई है, जबकि बाकी मामलों में कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई।
पुलिस के अनुसार, शिकायतें ऑनलाइन पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन के जरिए दर्ज की जाती हैं, जिन्हें संबंधित थानों में भेजा जाता है। कई मामलों में प्रारंभिक जांच और बयान दर्ज होने के बाद भी आगे की कार्रवाई नहीं हो पाती। न तो आरोपियों तक पहुंच बन पाती है और न ही ठगी गई राशि की पूरी रिकवरी हो पाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रायपुर में पिछले वर्ष साइबर फ्रॉड से 40 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी हुई, जिसमें से लगभग 7 करोड़ रुपए होल्ड कराए जा सके। वहीं हजारों फोन नंबर और बैंक खाते ब्लॉक किए गए, लेकिन ठगी के मास्टरमाइंड तक पहुंचना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मामलों की जांच व्यवस्था, डेटा प्रबंधन और स्टाफ की कमी के कारण कार्रवाई प्रभावी नहीं हो पा रही है, जिससे साइबर अपराधियों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं।



