छत्तीसगढ़ में नशे पर सख्ती बढ़ी: मुख्य सचिव के निर्देश, 500 मीटर में ड्रग-फ्री जोन, हर जिला अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र अनिवार्य

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नशाखोरी और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अब और कड़ी कार्रवाई होगी। मुख्य सचिव विकासशील ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए सभी कलेक्टर और एसपी को सख्त निर्देश दिए हैं कि ड्रग्स कारोबार, अवैध अफीम खेती और तस्करी में शामिल लोगों पर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित राज्य स्तरीय समन्वय समिति (NCORD) की बैठक में मुख्य सचिव ने विभिन्न एजेंसियों की कार्रवाई की समीक्षा की और कहा कि नशे के खिलाफ अभियान को और तेज किया जाए।
तस्करी पर सख्त निगरानी के निर्देश
मुख्य सचिव ने पुलिस, डाक विभाग और निजी कूरियर सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर जोर दिया। उन्होंने परिवहन और कूरियर के जरिए होने वाली तस्करी पर कड़ी निगरानी रखने, तस्करी में इस्तेमाल वाहनों को जब्त कर उनकी नीलामी की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। साथ ही अवैध केमिकल ड्रग लैब की पहचान कर तत्काल छापेमारी करने को कहा गया।
हर जिला अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र
नशे से प्रभावित लोगों के इलाज और पुनर्वास के लिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक जिला अस्पताल में कम से कम 10 बिस्तरों वाला नशा मुक्ति केंद्र अनिवार्य रूप से स्थापित किया जाए। जरूरत के अनुसार नए केंद्र भी खोले जाएंगे।
नशामुक्त भारत अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम चलाने के साथ टोल-फ्री हेल्पलाइन 1333 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए।
शैक्षणिक संस्थानों के आसपास ड्रग-फ्री जोन
युवाओं को नशे से बचाने के लिए सभी शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर दायरे को ड्रग-फ्री जोन घोषित किया जाएगा। इस क्षेत्र में सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी
बैठक में डीजीपी अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, गृह सचिव नेहा चंपावत सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, संभागायुक्त, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
सरकार का यह सख्त रुख साफ संकेत देता है कि राज्य में नशे के खिलाफ अब व्यापक और निर्णायक कार्रवाई देखने को मिलेगी।



