विवाह-पूर्व थैलेसीमिया जांच जरूरी, साइलेंट कैरियर बन सकते हैं बच्चों के लिए खतरा: डॉ. मुकेश शर्मा

रायपुर, 07 मई 2026। थैलेसीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी को रोकने के लिए विवाह-पूर्व जांच बेहद जरूरी है। यह बात नारायणा एमएमआई हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट जनरल मेडिसिन डॉ. मुकेश कुमार शर्मा ने कही। उन्होंने बताया कि देश में लाखों लोग थैलेसीमिया ट्रेट के साइलेंट कैरियर हैं, लेकिन अधिकांश को इसकी जानकारी नहीं होती।
डॉ. शर्मा ने कहा कि यदि दो कैरियर विवाह करते हैं, तो हर गर्भावस्था में 25 प्रतिशत संभावना रहती है कि बच्चा थैलेसीमिया मेजर से प्रभावित होगा। ऐसे बच्चों को जीवनभर नियमित रक्त चढ़ाने, लगातार इलाज और चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत पड़ती है, जिससे परिवार पर भावनात्मक और आर्थिक बोझ बढ़ता है।
उन्होंने बताया कि विवाह-पूर्व रक्त जांच के जरिए आसानी से पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति थैलेसीमिया का कैरियर है या नहीं। यदि दोनों साथी कैरियर पाए जाते हैं, तो वे समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेकर भविष्य की योजना बना सकते हैं।
डॉ. शर्मा के अनुसार, यह जांच विवाह रोकने के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को गंभीर बीमारी से बचाने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि जागरूकता की कमी के कारण कई परिवारों को बीमारी का पता बच्चे के जन्म के बाद चलता है।
उन्होंने अपील की कि विवाह पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण में थैलेसीमिया जांच को भी नियमित रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस बीमारी के मामलों को कम किया जा सके।



