
महासमुंद, 28मई 2026। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में करोड़ों रुपये के एलपीजी गैस गबन मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर और उसके बेटे सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपी होटल में छिपकर रह रहे थे और लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे। इससे पहले पुलिस इस मामले में जिला खाद्य अधिकारी समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने गुरुवार को प्रेसवार्ता में बताया कि सिंघोड़ा थाना में दर्ज एलपीजी गैस गबन मामले की जांच के दौरान फरार आरोपियों की तलाश के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई थीं। महासमुंद पुलिस की टीमें रायपुर, कवर्धा, छुईखदान, कान्हा-किसली, कोलकाता, पुणे, मुंबई और कोल्हापुर तक भेजी गई थीं।
जांच के दौरान पुलिस ने सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज, टोल प्लाजा डेटा और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसी दौरान सूचना मिली कि दोनों आरोपी महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित न्यू चालुक्य होटल में छिपे हुए हैं। इसके बाद स्थानीय पुलिस की मदद से दबिश देकर संतोष सिंह ठाकुर (57) और उसके पुत्र सार्थक सिंह ठाकुर (27) को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपी संतोष ठाकुर के कब्जे से 20 हजार रुपये नकद भी जब्त किए हैं।
पूछताछ में मुख्य आरोपी ने कई अहम खुलासे किए हैं। आरोपी ने बताया कि पूरे मामले में 1 करोड़ 30 लाख रुपये की मांग की गई थी, लेकिन सौदा 90 लाख रुपये में तय हुआ। इसमें पहले 45 लाख और दूसरी बार 15 लाख रुपये नकद दिए गए थे। बाकी 30 लाख रुपये ऑनलाइन सिक्योरिटी के तौर पर ट्रांसफर किए गए थे, जो बाद में नकद भुगतान होने पर वापस कर दिए गए।
पुलिस के अनुसार यह मामला सिंघोड़ा थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 96/25 से जुड़ा हुआ है। 24 दिसंबर 2025 को पुलिस ने एलपीजी गैस से भरे 6 कैप्सूल ट्रकों को जब्त किया था। भीषण गर्मी और सुरक्षा कारणों को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर 30 मार्च 2026 को इन वाहनों को खाद्य विभाग की मौजूदगी में ठाकुर पेट्रो केमिकल्स उरला रायपुर के संचालक संतोष सिंह ठाकुर के सुपुर्द किया गया था।
जांच में खुलासा हुआ कि सुपुर्द किए गए पांच कैप्सूल ट्रकों में भरी करीब 87 टन एलपीजी गैस की हेराफेरी की गई। इस गैस की कीमत करीब 77 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने इसे आपराधिक न्यास भंग, कूट रचना और कालाबाजारी का गंभीर मामला मानते हुए संतोष ठाकुर सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ बीएनएस और आवश्यक वस्तु अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया था।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस इससे पहले जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और निखिल वैष्णव को गिरफ्तार कर चुकी है। अब मुख्य आरोपी पिता-पुत्र की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासों की उम्मीद है।



