
रायपुर, 07 मई 2026// छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सुरक्षित मातृत्व और महिला सशक्तिकरण की मजबूत कड़ी बनकर उभरी है। राज्य सरकार की सक्रिय पहल और मैदानी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन के चलते यह योजना अब देशभर के लिए मॉडल बनती जा रही है। योजना के जरिए गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को आर्थिक सहायता देकर उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार किया जा रहा है।
1 जनवरी 2017 से संचालित इस योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल, पोषण और संस्थागत प्रसव के लिए प्रोत्साहित करना है। छत्तीसगढ़ in पहली जीवित संतान के जन्म पर महिलाओं को 5 हजार रुपए की सहायता दी जाती है। वहीं दूसरी संतान के रूप में बेटी होने पर 6 हजार रुपए की विशेष सहायता प्रदान की जाती है, जिससे बालिका जन्म को बढ़ावा मिल रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में योजना को मिशन मोड पर संचालित किया जा रहा है। दूरस्थ आदिवासी इलाकों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा घर-घर जाकर पंजीयन कराया जा रहा है।
राज्य ने डिजिटल मॉनिटरिंग और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली के प्रभावी उपयोग में देश में पहला स्थान हासिल किया है। वर्ष 2023-24 में जहां 1 लाख 75 हजार 797 महिलाओं का पंजीयन हुआ था, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 2 लाख 19 हजार 012 पहुंच गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 2 लाख 04 हजार 138 महिलाओं का पंजीयन कर राज्य ने 93.3 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है।
आवेदनों के परीक्षण और केंद्र से स्वीकृति दिलाने में भी छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी बना हुआ है। राज्य ने 83.87 प्रतिशत स्वीकृति दर दर्ज की है, जो राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बेहतर मानी जा रही है।
योजना के तहत शिकायत निवारण व्यवस्था को भी मजबूत बनाया गया है। लगभग 93 प्रतिशत शिकायतों का त्वरित निराकरण कर राज्य ने सुशासन का उदाहरण पेश किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मातृ वंदना योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कुपोषण, एनीमिया और मातृ मृत्यु दर जैसी चुनौतियों से लड़ने का प्रभावी माध्यम भी बन रही है। समय पर मिलने वाली सहायता राशि से महिलाओं को बेहतर पोषण मिल रहा है, जिससे स्वस्थ शिशु जन्म दर में सुधार हुआ है।



