जशपुर में सनसनी: 61 दिन पहले ‘मृत’ घोषित युवक जिंदा थाने पहुंचा, मर्डर केस से हिली पुलिस

जशपुर, 22 दिसंबर 2025/ छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में पुलिस और कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिस युवक को पुलिस 61 दिन पहले मृत घोषित कर चुकी थी, उसी युवक ने शनिवार रात जिंदा हालत में थाने पहुंचकर कहा— “मैं जिंदा हूं, मेरा मर्डर नहीं हुआ है।”
इस खुलासे के बाद न सिर्फ पूरा मर्डर केस सवालों के घेरे में आ गया है, बल्कि जेल में बंद आरोपियों की गिरफ्तारी, शव की पहचान और पुलिस जांच पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जिसे मरा समझा गया, वही जिंदा निकला
मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। युवक का नाम सीमित खाखा (30) बताया गया है। 22 अक्टूबर को पुरनानगर-बालाछापर के बीच तुरीटोंगरी जंगल में एक युवक की अधजली लाश मिली थी। पुलिस ने इसे सीमित खाखा का शव मानते हुए हत्या का मामला दर्ज किया और उसके तीन दोस्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
लेकिन शनिवार रात पूरा मामला तब पलट गया, जब सीमित खाखा खुद ग्राम पंचायत सिटोंगा की सरपंच कल्पना खलखो के साथ सिटी कोतवाली थाना पहुंच गया।
ऑटो चालक ने खोली पुलिस की पोल
सरपंच कल्पना खलखो ने बताया कि सीमित झारखंड से लौटते समय बस से उतरा और सिटोंगा जाने के लिए ऑटो में बैठा। ऑटो चालक सीमित को पहचानता था। उसने तुरंत फोन कर सूचना दी कि जिस युवक की हत्या के आरोप में लोग जेल में हैं, वही युवक जिंदा ऑटो में बैठा है।
इसके बाद सीमित को सीधे थाने लाया गया, जहां पुलिस भी उसे देखकर सन्न रह गई।
सीमित खाखा ने पुलिस को क्या बताया?
सीमित ने बताया कि वह रोजगार की तलाश में झारखंड गया था। रांची पहुंचने के बाद वह अपने साथियों से अलग हो गया और गिरिडीह जिले के सरईपाली गांव में खेतों में मजदूरी करने लगा।
उसके पास मोबाइल नहीं था, इसलिए वह परिवार या गांव वालों से संपर्क नहीं कर सका। वह क्रिसमस मनाने घर लौट रहा था, तभी उसे अपने ही मर्डर केस की जानकारी मिली। सीमित का कहना है कि उसे इस हत्या और केस की कोई जानकारी नहीं थी।
अब पुलिस के सामने बड़े सवाल
सीमित के जिंदा मिलने के बाद पुलिस के सामने कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं—
- जिस अधजली लाश को सीमित खाखा बताया गया, वह आखिर किसकी थी?
- सीमित के दोस्तों ने हत्या का जुर्म क्यों कबूला?
- मजिस्ट्रेट के सामने परिजनों ने शव की पहचान कैसे कर ली?
- पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक जांच में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?
SSP का बयान
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि वास्तविक मृतक की पहचान के लिए राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई है। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पूर्व में कार्रवाई की गई थी। फिलहाल मामले की जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपियों की रिहाई के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
क्या था पूरा मामला?
22 अक्टूबर को तुरीटोंगरी जंगल में अधजली लाश मिलने के बाद पुलिस ने मर्ग कायम किया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि होने पर बीएनएस की धारा 103(1) और 238(क) के तहत केस दर्ज किया गया।
पुलिस जांच में दावा किया गया कि शराब पीने के दौरान कमीशन को लेकर हुए विवाद में सीमित की चाकू और रॉड से हत्या कर शव को जंगल में पेट्रोल डालकर जलाया गया। आरोपियों ने मजिस्ट्रेट के सामने जुर्म कबूल किया और सभी प्रक्रियाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई।
अब जांच के घेरे में पूरी सिस्टम
जिस केस में पुलिस ने हत्या, कबूलनामा, पोस्टमॉर्टम और चार्जशीट तक की प्रक्रिया पूरी कर ली थी, वही केस अब एक जिंदा युवक के सामने आने से पूरी तरह ढह गया है। यह मामला पुलिस जांच, फोरेंसिक प्रक्रिया और न्यायिक स्वीकारोक्ति पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।



