बुज़ुर्गों के सम्मान पर ज़ोर: सीरत-उन-नबी कमेटी की कार्यशाला में बताए गए कानूनी अधिकार, सुलह और सुरक्षा के उपाय

रायपुर। शहर सीरत-उन-नबी कमेटी द्वारा संचालित सामाजिक काउंसलिंग सेंटर के तहत बुज़ुर्गों के अधिकार, सम्मान और सुरक्षा को लेकर एक विशेष जागरूकता कार्यशाला शनिवार को नूर-ए-सुब्ह हॉल, शास्त्री बाज़ार में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य पारिवारिक उपेक्षा, मानसिक प्रताड़ना और अधिकारों के हनन से जूझ रहे बुज़ुर्गों को जागरूक करना रहा।


कार्यक्रम में Senior Citizen Act 2007, भारतीय कानून में बुज़ुर्गों के अधिकार, परिवार द्वारा प्रताड़ना की स्थिति में उपलब्ध कानूनी उपाय, सामाजिक काउंसलिंग की प्रक्रिया तथा इस्लाम में बुज़ुर्गों के सम्मान के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने वास्तविक मामलों के उदाहरणों के जरिए समाधानात्मक मार्गदर्शन भी प्रस्तुत किया।

सामाजिक काउंसलिंग सेंटर के पैनल से जुड़े वरिष्ठ प्रशासनिक, पुलिस, विधि और सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञ उपस्थित रहे, जिनमें शरीफ मोहम्मद (पूर्व अतिरिक्त कलेक्टर), अब्दुल शफीक खान (सेवानिवृत्त उप पुलिस अधीक्षक), फैसल रिज़वी और सैयद ज़ाकिर अली (वरिष्ठ अधिवक्ता), निकहत खान, अय्यूब परीक, बाबा नवाब, कारी इमरान, नाज़मा परवीन और एडवोकेट शमीम रहमान सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद सोहेल सेठी ने कहा कि समाज की मजबूती बुज़ुर्गों के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ी है। कमेटी बुज़ुर्गों के अधिकारों की रक्षा, सुलह और सामाजिक शांति के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी। कार्यक्रम की संगठनात्मक जिम्मेदारी मोहम्मद सिराज ने निभाई।
कार्यक्रम में शहर के अनेक गणमान्य नागरिक और विभिन्न मस्जिदों के सदर भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कमेटी द्वारा संचालित सामाजिक काउंसलिंग सेंटर राजा तालाब क्षेत्र में बी.पी. पुजारी स्कूल के पीछे तथा कार्यालय बैजनाथपारा, मदरसा चौक में स्थित है, जहाँ आमजन के लिए निःशुल्क काउंसलिंग और मार्गदर्शन उपलब्ध है।
यह जानकारी मीडिया प्रभारी शेख शकील और अब्दुल नादिर खान ने संयुक्त रूप से दी।
कमेटी का संदेश: “झगड़े कम हों, आपसी समझ बढ़े और समाज में अमन, सौहार्द व भाईचारा कायम हो।”



