हाईकोर्ट ने मंत्र-प्रार्थना पर लगाई मुहर: स्कूलों में संस्कार और अनुशासन की पहल को मिली वैधता, सरकार ने फैसले का किया स्वागत

रायपुर, 02 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के शासकीय स्कूलों में मंत्र एवं प्रार्थना से जुड़े राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद सरकार ने इसे अपनी नीति और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की बड़ी जीत बताया है। इस संबंध में जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि न्यायालय का फैसला स्पष्ट करता है कि विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिकता, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों के विकास के उद्देश्य से लिया गया निर्णय जनहित में है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि कुछ लोगों ने भारतीय संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों को विवाद का विषय बनाने का प्रयास किया, लेकिन हाईकोर्ट के फैसले ने ऐसे प्रयासों को करारा जवाब दिया है। सरकार का मानना है कि शिक्षा केवल पुस्तक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि चरित्र निर्माण, कर्तव्यबोध और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित करना भी इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
सरकार ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यालयों में मंत्रोच्चार और प्रार्थना किसी धर्म विशेष के प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों, अनुशासन, सकारात्मक सोच और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का प्रयास है।
विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है तथा शिक्षा में गुणवत्ता, संस्कार और राष्ट्रनिर्माण से जुड़े सकारात्मक प्रयास आगे भी जारी रखे जाएंगे।
सरकार ने दावा किया कि प्रदेश की जनता और न्यायपालिका दोनों ने भारतीय संस्कृति और संस्कारों के विरोध की राजनीति करने वालों को स्पष्ट संदेश दिया है। साथ ही कहा गया कि सरकार अपने शिक्षा सुधार और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के संकल्प पर मजबूती से आगे बढ़ती रहेगी।



