अंतराष्ट्रीय

रूस से तेल खरीद पर अमेरिका का दबाव बेअसर: भारत ने बढ़ाया आयात, चीन के बाद बना दूसरा सबसे बड़ा खरीदार

नई दिल्ली। वैश्विक प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक दबाव के बावजूद भारत ने रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। मई 2026 में रूस से तेल आयात में 21% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे भारत चीन के बाद रूसी ईंधन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है।

यूरोप के थिंक टैंक CREA की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने मई में रूस से लगभग 5.8 अरब यूरो (करीब 6.7 अरब डॉलर) मूल्य के जीवाश्म ईंधन का आयात किया। इसमें कच्चे तेल की हिस्सेदारी 83% रही, जबकि तेल उत्पादों और कोयले का भी बड़े पैमाने पर आयात हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी दबाव और पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से खरीद बढ़ाई है। गुजरात के वाडिनार और जामनगर जैसे प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में रूसी कच्चे तेल की आवक में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

वाडिनार रिफाइनरी में अप्रैल की तुलना में 36% अधिक तेल उतारा गया, जबकि जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में डिलीवरी 14% बढ़ी। सरकारी तेल कंपनियों ने भी इस वर्ष की शुरुआत में आयात दोबारा शुरू करने के बाद खरीद बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सस्ता रूसी तेल भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात लागत को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा रहा है, इसलिए वैश्विक दबाव के बावजूद भारत अपनी रणनीतिक ऊर्जा नीति पर कायम है।

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Manish Tiwari

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