बुद्धिजीवियों का राष्ट्रव्यापी आह्वान: “बस्तर को माओवादी हिंसा से मुक्त कराएं, शांति और विकास सुनिश्चित करें”

रायपुर, 29 मई 2025 — छत्तीसगढ़ की राजधानी में आज Intellectual Forum of Chhattisgarh की अगुवाई में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन हुआ, जिसमें देशभर के प्रमुख बुद्धिजीवियों, अधिवक्ताओं, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने माओवादी आतंकवाद के समूल नाश और बस्तर के समग्र विकास के लिए सरकार और समाज से निर्णायक कार्रवाई की मांग की।
प्रेस वार्ता को प्रो. एस. के. पांडे (पूर्व कुलपति), अनुराग पांडे (सेवानिवृत्त IAS), बी. गोपा कुमार (पूर्व उप-सॉलिसिटर जनरल) और शैलेन्द्र शुक्ला (पूर्व निदेशक, क्रेडा) ने संबोधित किया। उन्होंने एक संयुक्त सार्वजनिक पत्र जारी किया, जिसे देश के कई वरिष्ठ न्यायविदों, सैन्य अधिकारियों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हस्ताक्षरित किया है।
मुख्य बिंदु जो उठाए गए:
- माओवादी हिंसा को वैचारिक समर्थन देने वाले समूहों की आलोचना करते हुए वक्ताओं ने इसे आम नागरिकों की पीड़ा का अपमान बताया।
- वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि तथाकथित ‘शांति वार्ता’ तभी संभव है जब माओवादी हथियार और हिंसा का मार्ग पूरी तरह त्यागें।
- माओवादी समर्थक ‘फ्रंटल संगठनों’ की पहचान कर वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई।
- सलवा जुडूम पर बार-बार सवाल उठाने को माओवादियों को नैतिक छूट देने का प्रयास बताया गया।
इतिहास से सबक: वक्ताओं ने चेताया कि 2004 की वार्ता के बाद 2010 में ताइमेटला जैसे नरसंहार ने यह सिद्ध कर दिया है कि ‘शांति की बातें’ महज माओवादी पुनर्गठन की रणनीति हो सकती हैं।
प्रमुख माँगें:
- सरकार माओवादी आतंकवाद के विरुद्ध सतत और सशक्त कार्रवाई जारी रखे।
- हिंसा त्यागे बिना किसी संगठन या व्यक्ति से शांति वार्ता न की जाए।
- माओवादी समर्थक संगठनों की वैधानिक पहचान कर उन पर कठोर कार्रवाई हो।
- बस्तर की शांति और विकास के लिए व्यापक और ठोस नीति लागू हो।
पत्र पर हस्ताक्षरकर्ता संस्थाएँ:
Intellectual Forum of Chhattisgarh, Bharat Lawyers Forum, Society For Policy and Strategic Research, Center For Janjatiya Studies and Research, Forum For Awareness of National Security, Bastar Shanti Samiti, Shakti Vigyan Bharti, Call For Justice, The 4th Pillar, Writers For The Nation, Chhattisgarh Civil Society, Janjati Suraksha Manch, Avsar Foundation व बस्तर सांस्कृतिक सुरक्षा मंच समेत कुल 15 मंच।
प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता व्यक्तित्व:
Justice Rakesh Saksena, Major General Mrinal Suman, Brig. Rakesh Sharma, Dr. T.D. Dogra, Rakesh Chaturvedi (सेवानिवृत्त IFS), Dr. Varnika Sharma, Prof. B.K. Sthapak, Shyam Singh Kumre (सेवानिवृत्त IAS), Adv. Sangharsh Pandey, Adv. Kaustubh Shukla, Kiran Sushma Khoya, Prof. Dinesh Parihar, Vikrant Kumre सहित दर्जनों प्रबुद्धजन शामिल हैं।
यह आह्वान है —
बस्तर की पीड़ा को समझने का, माओवादी आतंक के खिलाफ एकजुट होने का, और न्यायपूर्ण विकास की दिशा में निर्णायक कदम उठाने का।



