देश पर ‘सुपर अल नीनो’ का खतरा: 150 साल का रिकॉर्ड टूटने की आशंका, कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ और भीषण गर्मी का अलर्ट

नई दिल्ली, 21 मई 2026। देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच वैज्ञानिकों ने ‘सुपर अल नीनो’ को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में तेजी से बन रही यह जलवायु घटना 1877 के बाद की सबसे खतरनाक अल नीनो साबित हो सकती है। इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य भारत के कई हिस्सों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी लू और भीषण गर्मी जारी रहने की चेतावनी दी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार बनने वाला ‘सुपर अल नीनो’ सामान्य अल नीनो से कहीं ज्यादा ताकतवर हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो बनने पर प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक हो जाता है, जिससे वैश्विक पवन चक्र प्रभावित होता है। इसका सीधा असर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ता है। मानसून कमजोर होने से देश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ की स्थिति भी पैदा हो सकती है।
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि समुद्र की सतह का तापमान इस बार 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जो 1877 के रिकॉर्ड 2.7 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक होगा। अमेरिकी एजेंसी NOAA के मुताबिक, मई से जुलाई 2026 के बीच अल नीनो बनने की 82 प्रतिशत संभावना है, जबकि इसके 2027 तक बने रहने की आशंका 96 प्रतिशत तक जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में सूखे का खतरा सबसे ज्यादा रहेगा। वहीं चेन्नई समेत दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बन सकती है। मानसून कमजोर पड़ने से खरीफ फसलों पर भी असर पड़ेगा, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि 1982-83 और 1997-98 के अल नीनो के दौरान दुनिया को खरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था। ऐसे में इस बार का ‘सुपर अल नीनो’ वैश्विक अर्थव्यवस्था और मौसम व्यवस्था दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।



