रूसी तेल विवाद पर अमेरिका को भारत का कड़ा जवाब, कहा- ऊर्जा नीति पर कोई बाहरी दबाव नहीं चलेगा, निर्णय भारत का रहेगा

नई दिल्ली। रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच एक बार फिर कूटनीतिक तनाव के संकेत सामने आए हैं। अमेरिका द्वारा भारत सहित अन्य देशों को रूस से तेल आयात कम करने के निर्देशों पर भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि देश की ऊर्जा नीति का निर्णय पूरी तरह नई दिल्ली में लिया जाएगा, वॉशिंगटन में नहीं।
भारत ने दो-टूक शब्दों में कहा कि “तुम कौन होते हो हमें आदेश देने वाले, भारत खुद तय करेगा कि वह कहां से और कितनी मात्रा में तेल खरीदेगा।” सरकार ने यह भी दोहराया कि उसकी प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा, राष्ट्रीय हित और आर्थिक स्थिरता है।
अमेरिका के बयान से बढ़ा विवाद
यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रूस से तेल खरीद पर दी गई छूट और विशेष व्यवस्थाओं को समाप्त करने की बात कही थी। उनके बयान के बाद भारत की ऊर्जा नीति पर दबाव बढ़ने की चर्चा तेज हो गई है।
भारत का स्पष्ट रुख: रणनीतिक स्वायत्तता सर्वोपरि
भारत ने साफ किया है कि वह एक 140 करोड़ आबादी वाला संप्रभु राष्ट्र है और अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए सस्ते व भरोसेमंद विकल्प चुनने का अधिकार रखता है। सरकार का कहना है कि रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) भारत की विदेश नीति का मूल सिद्धांत है, जिससे कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बदले समीकरण
फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़े बदलाव आए। पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद भारत ने अपनी जरूरतों के अनुसार रियायती दरों पर रूसी तेल खरीद जारी रखी।
चीन का मुद्दा भी चर्चा में
इस पूरे विवाद के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि चीन अब भी रूस का सबसे बड़ा ऊर्जा खरीदार बना हुआ है, फिर भी उस पर अपेक्षाकृत नरम रुख क्यों अपनाया जाता है। इससे अंतरराष्ट्रीय नीतियों की समानता और दोहरे मानदंड पर बहस तेज हो गई है।



