धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, हाईकोर्ट बोला– कानून अभी लागू ही नहीं हुआ

रायपुर, 24 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता ने इसे संविधान के कई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए असंवैधानिक घोषित करने की मांग की थी।
📌 कोर्ट में क्या हुआ?
मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायमूर्ति रविंद्र अग्रवाल की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। याचिका अमरजीत पटेल की ओर से अधिवक्ता ज्ञानेंद्र कुमार महिलांग ने दाखिल की थी।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने याचिका की ग्राह्यता पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह मामला अभी न्यायिक समीक्षा के लिए परिपक्व नहीं है, क्योंकि कानून अभी लागू ही नहीं हुआ है।
⚖️ याचिका में क्या तर्क दिए गए थे?
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि यह विधेयक—
- अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 21, 25 और 29 का उल्लंघन करता है
- धार्मिक स्वतंत्रता और अंतःकरण की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाता है
- अस्पष्ट, मनमाना और भेदभावपूर्ण प्रावधानों से युक्त है
इसी आधार पर इसे निरस्त करने की मांग की गई थी।
📜 हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि अभी तक राज्य सरकार ने अधिनियम के लागू होने की तिथि अधिसूचित नहीं की है, इसलिए यह याचिका “प्रीमैच्योर” (समय से पहले दायर) है और इस आधार पर इसे खारिज किया जाता है।
🧾 कानून की स्थिति क्या है?
जानकारी के अनुसार—
- विधेयक 19 मार्च 2026 को विधानसभा से पारित हुआ
- 10 अप्रैल 2026 को राज्यपाल की स्वीकृति के बाद अधिसूचना प्रकाशित हुई
- लेकिन लागू होने की तारीख अभी तय नहीं की गई है
इसी तकनीकी आधार पर कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
👉 फिलहाल यह मामला कानून के लागू होने से पहले ही न्यायिक स्तर पर समाप्त हो गया है, हालांकि आगे कानून लागू होने के बाद इसे फिर से चुनौती दिए जाने की संभावना बनी रह सकती है।



