Bilaspur Scam: चपरासी बना ‘मालिक’! 15 महीने में वेतन के नाम पर खाते में डलवा लिए ₹29.62 लाख, खुद ही बनाया बिल और खुद ही किया पास, शिक्षा विभाग में हड़कंप

बिलासपुर, 05 मार्च 2026। शिक्षा विभाग के कोटा ब्लॉक में बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। यहां पदस्थ एक भृत्य (चपरासी) ने बीते 15 महीनों में वेतन के नाम पर अपने ही बैंक खाते में 29 लाख 62 हजार 322 रुपए अतिरिक्त जमा करा लिए। चौंकाने वाली बात यह है कि तत्कालीन और वर्तमान बीईओ द्वारा उसे आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) से जुड़े अधिकार दे दिए गए थे, जिसका उसने जमकर दुरुपयोग किया।
खुद ही बनाया वेतन बिल, खुद ही किया पास
कोटा बीईओ कार्यालय में पदस्थ देवेन्द्र कुमार पालके मूलतः भृत्य है, लेकिन पिछले 10-15 वर्षों से वेतन बिल बनाने का काम देख रहा था। वह मेकर आईडी से वेतन तैयार करता था और अधिकारियों की चेकर आईडी व डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग कर बिलों को पास भी कर देता था। नियमों के मुताबिक बिलों का सत्यापन डीडीओ को करना होता है, लेकिन यहां चपरासी ही बिल बनाकर खुद ही कोषालय भेज देता था।
ऐसे खुला फर्जीवाड़े का राज
संचालनालय कोष, लेखा एवं पेंशन ने डेटा का रैंडम परीक्षण किया, जिसमें एक कर्मचारी के वेतन में असामान्य वृद्धि पाई गई। जांच के आदेश वरिष्ठ कोषालय अधिकारी, बिलासपुर को दिए गए। जांच में खुलासा हुआ कि—
- सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच आरोपी ने करीब 25.04 लाख रुपए अतिरिक्त निकाले।
- मार्च 2025 से नवंबर 2025 के बीच फिर 4.57 लाख रुपए की अतिरिक्त निकासी की गई।
- कुछ महीनों में तो उसके खाते में 4.95 लाख रुपए तक ट्रांसफर किए गए।
कई आरोपियों पर FIR
जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने एक से अधिक आरोपियों के खिलाफ वित्तीय अनियमितता, दस्तावेजों से छेड़छाड़ और अन्य धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। मामले में तत्कालीन और वर्तमान अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
यह प्रकरण शिक्षा विभाग की वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पुलिस और कोषालय विभाग की संयुक्त जांच जारी है।



