
रायपुर | 03 मार्च 2026
राजधानी रायपुर में ड्रग्स तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। कथित ‘ड्रग्स क्वीन’ नव्या मलिक और विधि अग्रवाल समेत गिरफ्तार 43 तस्करों के मोबाइल की जांच में 620 से ज्यादा लोगों के नंबर मिले हैं। इनमें से 320 युवक-युवती सीधे नव्या-विधि गिरोह के संपर्क में थे। पुलिस के अनुसार, ये लोग हर महीने 10 से 20 लाख रुपए तक का ड्रग्स और सूखा नशा मंगाते थे।
पहली बार बनी ‘एडिक्ट्स लिस्ट’
पुलिस ने चैट, बैंक ट्रांजेक्शन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर ड्रग्स खरीदने वालों की विस्तृत सूची तैयार की है। इस सूची में नाम, पता और मोबाइल नंबर शामिल हैं। सूची को महिला एवं बाल विकास विभाग और गृह विभाग को भेजा गया है, ताकि नशा मुक्ति काउंसिलिंग की पहल की जा सके।
हालांकि, पुलिस ने सूची में शामिल कई हाई-प्रोफाइल लोगों को थाने बुलाकर पूछताछ की, लेकिन ठोस साक्ष्य या कानूनी आधार न होने के कारण कार्रवाई नहीं की गई। पूछताछ के बाद अधिकांश को छोड़ दिया गया। इनमें कई रसूखदार परिवारों के युवक-युवतियां शामिल बताए जा रहे हैं।
23 अगस्त 2025 का ट्रैप
जांच में सामने आया कि 23 अगस्त 2025 को हरियाणा का तस्कर मोनू विश्नोई ट्रेन से ड्रग्स लेकर रायपुर पहुंचा। स्टेशन से उतरने के बाद उसने नव्या मलिक को फोन किया। नव्या शहर से बाहर थी, इसलिए उसने एक्सप्रेस-वे के पास इंतजार करने को कहा और ड्रग्स लेने के लिए हर्ष आहूजा व दीप धनोरिया को भेजा।
मुखबिर की सूचना पर पुलिस पहले से ट्रैप लगाकर बैठी थी। जैसे ही लेन-देन हुआ, तीनों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद कॉल डिटेल खंगालने पर पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ और छापेमारी कर अन्य आरोपियों को पकड़ा गया।
4 माह से फाइल लंबित
सूत्रों के अनुसार, ड्रग्स लेने वालों की सूची पिछले चार माह से विभागीय फाइलों में लंबित है। अब तक काउंसिलिंग या पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। पुलिस की मंशा थी कि विशेषज्ञों की मदद से इन युवाओं को नशा मुक्ति कार्यक्रम से जोड़ा जाए और परिजनों को भी जागरूक किया जाए।
हर वार्ड में नशा मुक्ति केंद्र की जरूरत
सूखा नशा लेने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि को देखते हुए पुलिस ने सुझाव दिया है कि शहर के हर वार्ड में नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किए जाएं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी से काउंसिलिंग और पुनर्वास कार्यक्रम चलाने की जरूरत बताई गई है।
फिलहाल सवाल यह है कि 620 लोगों की ‘नशे वाली कुंडली’ सामने आने के बाद क्या सरकार ठोस कदम उठाएगी या यह मामला भी फाइलों में ही दबा रह जाएगा।



