राम अवतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा मोड़: दोषी शूटर चिमन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, जेल से रिहाई का रास्ता साफ

रायपुर, 04 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मामले में दोषी करार दिए गए शूटर चिमन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद उसके जेल से रिहा होने का रास्ता साफ हो गया है। यह राहत जिला अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई के दौरान मिली।
यह मामला वर्ष 2003 में हुए चर्चित हत्याकांड से जुड़ा है। 4 जून 2003 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के तत्कालीन प्रदेश कोषाध्यक्ष राम अवतार जग्गी की रायपुर के मौदहापारा थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय इस हत्याकांड ने पूरे प्रदेश की राजनीति और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
मामले की सुनवाई के बाद वर्ष 2007 में रायपुर की जिला अदालत ने शूटर चिमन सिंह, याह्या ढेबर, एएस गिल समेत कुल 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं, अमित जोगी को निचली अदालत ने बरी कर दिया था। बाद में हाईकोर्ट ने उन्हें भी दोषी ठहराया, हालांकि उस फैसले पर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है।
चिमन सिंह ने जिला अदालत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अपील पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए अंतरिम राहत प्रदान की। अब आगे मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी रहेगी और अंतिम फैसला आने तक जमानत की शर्तों का पालन करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट से मिली इस राहत के बाद करीब दो दशक पुराने इस चर्चित हत्याकांड की एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी इस फैसले को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना जताई जा रही है।



