छत्तीसगढ़

विशेष लेख : 2047 के विकसित छत्तीसगढ़ की नींव मजबूत कर रही शिक्षा, नवाचार और युवा शक्ति, GER 27.5% तक पहुंचा

रायपुर, 25 सितंबर 2026। विकसित और समृद्ध राज्य के निर्माण में युवाओं की बौद्धिक क्षमता, कौशल और कार्यकुशलता की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल में GYAN यानी गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी को केंद्र में रखते हुए शिक्षा और युवा शक्ति को विकास का प्रमुख आधार बनाया जा रहा है।

प्रदेश में उच्च शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रखते हुए इसे गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत उच्च शिक्षा विभाग मिशन मोड में कार्य कर रहा है।

GER बढ़कर 27.5 प्रतिशत पहुंचा

उच्च शिक्षा मिशन योजना के तहत किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात (GER) वर्ष 2021-22 के 19.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्तमान में 27.5 प्रतिशत हो गया है। इसे वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।

विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस महाविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। वहीं शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना का खाका तैयार किया गया है।

आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर

प्रदेश में शिक्षा को स्थानीय जड़ों से जोड़ने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान के साथ पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली को भी विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा से भी जोड़ना है।

200 सरकारी कॉलेजों का NAAC मूल्यांकन पूरा

उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए NAAC मूल्यांकन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पात्र 254 शासकीय महाविद्यालयों में से 200 महाविद्यालयों का मूल्यांकन पूरा हो चुका है। इसी तरह प्रदेश के 9 विश्वविद्यालयों में से 5 विश्वविद्यालयों का NAAC मूल्यांकन भी पूर्ण हो गया है।

नए कॉलेज और विश्वविद्यालयों का विस्तार

शैक्षणिक अवसंरचना के विस्तार के तहत वर्ष 2025-26 में 8 नए शासकीय महाविद्यालय, 5 नए निजी महाविद्यालय और 3 नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल और क्रीड़ाधिकारी के पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है।

शिक्षा, शोध, नवाचार, कौशल और रोजगार पर केंद्रित ये प्रयास वर्ष 2047 के विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

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Manish Tiwari

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