छत्तीसगढ़

CGPSC घोटाले में नया मोड़: ED को मिले डिजिटल सबूत और 170 बैंक ट्रांजेक्शन, बोरघरिया के खाते में 66.64 लाख

रायपुर, 15 सितम्बर 2026 छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय के OSD और वर्तमान एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी के बाद जांच में कई अहम खुलासे किए हैं। ED ने बोरघरिया को सात दिन की कस्टोडियल रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

ED के अनुसार, CGPSC की वर्ष 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक, उम्मीदवारों से अवैध वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जांच के दौरान बोरघरिया की भूमिका सामने आई है। जांच की शुरुआत रायपुर स्थित EOW में दर्ज FIR के आधार पर हुई थी। इस मामले में CBI भी जांच कर चुकी है और तत्कालीन PSC अध्यक्ष समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की जा चुकी है।

जांच एजेंसी का दावा है कि उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC परीक्षा-2021 के कई उम्मीदवारों से कथित तौर पर 3 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध रकम वसूली। आरोप है कि उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर यह राशि ली गई।

ED की जांच में यह भी सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए गए। एजेंसी के मुताबिक, उम्मीदवारों को रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस ले जाया गया, जहां प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया। इसके बाद मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्रों के आधार पर कथित तौर पर कोचिंग देने के लिए उम्मीदवारों को महासमुंद जिले के बारनवापारा अभयारण्य के आसपास स्थित एक सैंक्चुअरी रिजॉर्ट ले जाने का भी आरोप है।

बोरघरिया के खाते में 170 लेन-देन से जमा हुए 66.64 लाख रुपए

ED के मुताबिक, संबंधित अवधि में चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में 170 अलग-अलग लेन-देन के जरिए कुल 66 लाख 64 हजार रुपए जमा हुए। एजेंसी ने 1 सितंबर को बोरघरिया से जुड़े परिसरों में तलाशी ली थी, जहां से मोबाइल फोन समेत कई डिजिटल उपकरण बरामद किए गए।

ED का दावा है कि इन डिजिटल उपकरणों से चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कथित बातचीत के साक्ष्य मिले हैं। इनमें रकम की वापसी और भुगतान की मांग से संबंधित चर्चाएं सामने आने की बात कही गई है।

OPC कंपनी के जरिए कथित तौर पर घुमाया गया पैसा

जांच के दौरान मेसर्स फिगरकेव ई-कॉम (OPC) प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से हुए वित्तीय लेन-देन की जानकारी भी सामने आई है। ED का आरोप है कि इस कंपनी का इस्तेमाल कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन को जमा करने और विभिन्न लेन-देन के जरिए आगे भेजने के लिए किया गया।

एजेंसी के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों, बैंक खातों के लेन-देन और जांच के दौरान दर्ज बयानों के आधार पर चेतन बोरघरिया की कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन के अधिग्रहण, कब्जे और उपयोग से जुड़ी गतिविधियों में भूमिका सामने आई है।

फिलहाल चेतन बोरघरिया सात दिन की ED कस्टडी में हैं और उनसे पूछताछ जारी है। ED ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है और जांच पूरी होने तथा अदालत में आरोपों के परीक्षण के बाद ही पूरे मामले की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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Manish Tiwari

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