रायपुर में मलबा फेंका तो खैर नहीं: नगर निगम का सख्त ड्राफ्ट तैयार, बार-बार गलती पर वाहन जब्ती के साथ भारी जुर्माना

रायपुर, 28 अक्टूबर। राजधानी रायपुर में अब सड़क, नाली और जलस्रोतों में निर्माण का मलबा फेंकना भारी पड़ सकता है। रायपुर नगर निगम ने निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे के व्यवस्थित प्रबंधन के लिए सख्त उपनियमों का मसौदा तैयार किया है। इसके तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 1 लाख रुपये तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। हालांकि, ये प्रावधान फिलहाल मसौदे में हैं और अंतिम रूप से लागू नहीं हुए हैं।
सड़क पर मलबा फेंकने पर 50 हजार तक जुर्माना
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, सड़क या खाली जगह पर वाहन से मलबा फेंकने पर पहली बार 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है। तीसरी बार या उसके बाद उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपये तक जुर्माने के साथ वाहन जब्त करने का प्रावधान प्रस्तावित है।
वहीं, नाली, नाले या जलस्रोत में मलबा डालने पर पहली बार 25 हजार रुपये और बार-बार ऐसा करने पर 1 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। हाथठेला या सिर पर ढोकर एक टन से कम मलबा सड़क, प्लॉट या नाली में फेंकने पर पहली बार 2 हजार रुपये और बार-बार उल्लंघन करने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव है।
24 घंटे से ज्यादा सड़क पर नहीं रख सकेंगे मलबा
मसौदे के मुताबिक, लिखित अनुमति के बिना सड़क, फुटपाथ, नाली, नाले, जलस्रोत या नगर निगम के पार्क में 24 घंटे से ज्यादा मलबा रखना प्रतिबंधित होगा। मलबे को घरेलू कचरे में मिलाने पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव है।
मकान तोड़ने से पहले लेनी होगी निगम की अनुमति
नए प्रस्ताव के तहत किसी भी भवन को तोड़ने से पहले नगर निगम से अनुमति लेना अनिवार्य किया जा सकता है। आवेदन में मलबे की अनुमानित मात्रा, तोड़फोड़ का समय, धूल रोकने के उपाय, सुरक्षा व्यवस्था और मलबे को ले जाने के स्थान की जानकारी देनी होगी।
अनुमति मिलने के बाद निर्धारित सुरक्षा राशि और शुल्क भी जमा करना होगा। निर्माण कार्य पूरा होने पर मलबे को अधिकृत केंद्र तक पहुंचाने से संबंधित चालान, तौल पर्ची या पोर्टल पर दर्ज जानकारी देनी होगी। इन प्रक्रियाओं को पूरा किए बिना भवन का पूर्णता प्रमाणपत्र या अधिभोग प्रमाणपत्र जारी नहीं करने का प्रावधान प्रस्तावित है।
बड़े निर्माण प्रोजेक्टों के लिए अलग योजना
20 हजार वर्गमीटर या उससे अधिक निर्मित क्षेत्र वाले निर्माण और तोड़फोड़ प्रोजेक्टों के लिए मलबा प्रबंधन योजना देना जरूरी होगा। इसमें मलबे की मात्रा, अलग-अलग सामग्रियों का वर्गीकरण, भंडारण, परिवहन और पुनर्चक्रण की जानकारी देनी होगी।
मलबा ले जाने वाले अधिकृत वाहनों को ढककर रखना होगा। बड़े प्रोजेक्टों में मलबा परिवहन करने वाले वाहनों में जीपीएस लगाने की शर्त भी प्रस्तावित है। नगर निगम अपने सड़क और नाली निर्माण कार्यों में पुनर्चक्रित मलबे से बनी सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा देगा।
सभी 10 जोन में बनेंगे मलबा संग्रह केंद्र
नगर निगम के मसौदे में एक साल के भीतर सभी 10 जोन में कम से कम एक मलबा संग्रह केंद्र अधिसूचित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही पुराने अवैध मलबा डंपिंग स्थलों की सूची तैयार कर उनके निपटान की योजना बनाई जाएगी।
नागरिक मलबा फेंकने या संग्रह केंद्र से जुड़ी शिकायत नगर निगम की हेल्पलाइन 1100, वार्ड कार्यालय या संबंधित मोबाइल एप के माध्यम से कर सकेंगे। शिकायतों का निपटारा 15 कार्यदिवस के भीतर करने का प्रस्ताव है।
हर महीने निकलता है हजारों टन मलबा
अनुमान के मुताबिक, शहर में हर महीने लगभग 20 हजार मकानों से संबंधित निर्माण या तोड़फोड़ के कारण करीब 20 हजार टन मलबा निकलता है। सालभर में यह आंकड़ा लगभग 2.40 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में मलबे के व्यवस्थित संग्रहण, परिवहन और निपटान के लिए नए नियम तैयार किए जा रहे हैं।
क्या बोले नगर निगम आयुक्त?
रायपुर नगर निगम के आयुक्त संबित मिश्रा के अनुसार, निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान जरूरी है। इसके लिए उपनियमों का मसौदा तैयार किया जा रहा है, जिसे मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) के समक्ष प्रस्ताव के रूप में रखा जाएगा। वहां चर्चा और अनुमोदन के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
ध्यान दें: मलबा फेंकने पर जुर्माने और भवन तोड़ने से पहले अनुमति संबंधी प्रावधान अभी प्रस्तावित हैं। अंतिम नियम और उनकी प्रभावी तारीख तय होने के बाद ही इन्हें लागू किया जाएगा।



