छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार पर बड़ा खुलासा: रिश्वत लेने में राजस्व विभाग नंबर-1, सूरजपुर में सबसे ज्यादा 16 मामले दर्ज
रायपुर, 28 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में सरकारी कामकाज के बदले रिश्वत मांगने के मामलों में राजस्व विभाग सबसे आगे है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 से 28 मई 2026 तक प्रदेश में रिश्वतखोरी के 154 ट्रैप प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें कुल 193 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए। इन मामलों में रिश्वत की कुल राशि 51 लाख 67 हजार 540 रुपये दर्ज की गई है।
आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में छह मामलों में सजा भी दर्ज की गई है। विभागवार आंकड़ों में राजस्व विभाग पहले स्थान पर है। यहां रिश्वतखोरी के 56 मामलों में 67 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग में 20 मामलों में 25, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 14 मामलों में 15 और गृह (पुलिस) विभाग में 10 मामलों में 13 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए। वहीं, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में सात मामलों में 10 लोकसेवकों को पकड़ा गया।
2025 में सबसे ज्यादा रिश्वतखोरी के मामले
वर्षवार आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 में सबसे ज्यादा रिश्वतखोरी के मामले सामने आए। इस साल 60 ट्रैप प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें 71 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए। वर्ष 2024 में 44 मामलों में 57 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
वर्ष 2021 और 2022 में 13-13 ट्रैप प्रकरण दर्ज हुए थे। वर्ष 2021 में 14 और 2022 में 18 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए। वर्ष 2023 में कोई ट्रैप प्रकरण दर्ज नहीं हुआ। वहीं, 28 मई 2026 तक 24 मामलों में 33 लोगों को पकड़ा जा चुका था।
निर्माण भुगतान से लेकर जमीन के काम तक रिश्वत
ACB के आंकड़ों के मुताबिक, रिश्वत मांगने के प्रमुख कारणों में निर्माण कार्यों के भुगतान से जुड़े मामले सबसे अधिक हैं। निर्माण कार्य का भुगतान कराने के बदले रिश्वत मांगने के 14 प्रकरण दर्ज किए गए।
इसके अलावा जमीन का सीमांकन कराने, नामांतरण और राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त कराने के लिए रिश्वत मांगने के आठ-आठ मामले सामने आए। मुआवजा राशि दिलाने के लिए छह और पेंशन या ग्रेच्युटी जारी कराने के लिए पांच प्रकरण दर्ज किए गए।
सूरजपुर में सबसे ज्यादा 16 मामले दर्ज
जिलावार आंकड़ों में सूरजपुर 16 प्रकरणों के साथ पहले स्थान पर है। रायपुर में 13, सरगुजा में 12 और रायगढ़ में 11 मामले दर्ज किए गए। मुंगेली और बिलासपुर में आठ-आठ, जबकि दुर्ग, बलरामपुर और जांजगीर-चांपा में सात-सात प्रकरण सामने आए।
शिकायत मिलने पर बनाई जाती है ट्रैप टीम
एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के अधिकारियों के मुताबिक, रिश्वतखोरी की शिकायत मिलने के बाद उसकी जांच की जाती है। शिकायत में तथ्य मिलने पर कार्रवाई के लिए विशेष ट्रैप टीम तैयार की जाती है। इसके बाद संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को पकड़ने की कार्रवाई की जाती है।
ACB और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के प्रमुख अमरेश मिश्रा के अनुसार, भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों पर लगातार कार्रवाई की जाएगी।
आंकड़ों से साफ है कि सरकारी कामकाज में रिश्वतखोरी की शिकायतों में राजस्व विभाग सबसे आगे है। जमीन से जुड़े काम, निर्माण भुगतान और सरकारी लाभ जारी कराने जैसे मामलों में रिश्वत मांगने की शिकायतें सामने आई हैं।



