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CNG पंपों पर लंबी कतारों से मिलेगी राहत: AI बताएगा कहां है भीड़, 2030 तक फ्यूल स्टेशनों को स्मार्ट बनाने की तैयारी

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2026। देश में सीएनजी (CNG) वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच पेट्रोल पंपों और सीएनजी स्टेशनों पर लंबी कतारें वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई हैं। कई बार गैस भरवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। अब इस समस्या को दूर करने के लिए तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली जा रही है। नावगति (Nawgati) नाम का स्टार्टअप फ्यूल स्टेशनों को स्मार्ट बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ वैभव कौशिक ने एक इंटरव्यू में बताया कि कैसे AI और आधुनिक तकनीक की मदद से सीएनजी पंपों पर लगने वाली लंबी कतारों को कम किया जा सकता है। कंपनी का लक्ष्य वाहन चालकों को स्टेशनों पर भीड़ और इंतजार के समय की सटीक जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपना समय बचा सकें।

2019 में आया था स्टार्टअप शुरू करने का विचार

नावगति की शुरुआत वर्ष 2019 में नोएडा में एक वास्तविक अनुभव के बाद हुई थी। वैभव कौशिक ने बताया कि इंटर्नशिप के दौरान वह सीएनजी कैब से सफर करते थे। उस समय उन्होंने महसूस किया कि कैब ड्राइवर दिनभर करीब 10 घंटे काम करते हैं, लेकिन लगभग एक घंटा सीएनजी पंप की लाइन में ही बीत जाता है।

इससे ड्राइवरों का कीमती समय बर्बाद होने के साथ उनकी कमाई पर भी असर पड़ता है। उनके काम के समय का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा केवल गैस भरवाने में निकल जाता था। इसी समस्या को समझते हुए उन्होंने ऐसा तकनीकी समाधान विकसित करने का विचार किया, जिससे ड्राइवरों को लंबी कतारों से राहत मिल सके।

CCTV कैमरों और AI से पता चलेगी पंप पर भीड़

फ्यूल स्टेशनों पर अक्सर समस्या ईंधन की उपलब्धता से ज्यादा सही जानकारी की कमी की होती है। वाहन चालकों को पहले से पता नहीं होता कि किस सीएनजी पंप पर कितनी भीड़ है और गैस भरवाने के लिए उन्हें कितनी देर इंतजार करना पड़ेगा।

इस परेशानी को दूर करने के लिए नावगति ने एक ऐसा प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो फ्यूल स्टेशनों पर पहले से मौजूद बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करता है। इसमें सीसीटीवी कैमरों, कंप्रेसर और डिस्पेंसर से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण कंप्यूटर विजन और AI की मदद से किया जाता है।

इस तकनीक से स्टेशन पर वाहनों की संख्या, भीड़ की स्थिति और सर्विस में लगने वाले समय का अनुमान लगाने में मदद मिलती है। इससे वाहन चालकों को बेहतर स्टेशन चुनने और अनावश्यक इंतजार से बचने में सहूलियत मिल सकती है।

पंप संचालकों को नहीं लगाने पड़ेंगे महंगे उपकरण

नई तकनीक को पारंपरिक और सरकारी क्षेत्र से जुड़े कारोबारों में लागू करना आसान नहीं है। इसके लिए कारोबारियों का भरोसा जीतना और उन्हें तकनीक के फायदे समझाना जरूरी होता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए नावगति ने ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसे मौजूदा सिस्टम के साथ जोड़ा जा सकता है। इसके लिए पेट्रोल पंप या सीएनजी स्टेशन संचालकों को भारी-भरकम नए उपकरण खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे तकनीक को अपनाने की लागत कम रखने में मदद मिल सकती है।

2030 तक फ्यूल स्टेशनों को मल्टी-एनर्जी हब बनाने की योजना

नावगति का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश के फ्यूल और मोबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक आधुनिक और स्मार्ट बनाने में योगदान देना है। भविष्य में पेट्रोल-डीजल और सीएनजी स्टेशन केवल ईंधन भरने की जगह नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें मल्टी-एनर्जी हब के रूप में विकसित करने की योजना है।

ऐसे स्टेशनों पर पारंपरिक ईंधन के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग और ऊर्जा के दूसरे विकल्प भी उपलब्ध हो सकते हैं। इससे अलग-अलग प्रकार के वाहनों के चालकों को एक ही स्थान पर कई सुविधाएं मिल सकेंगी।

इस तकनीक का उद्देश्य वाहन चालकों को यात्रा शुरू करने से पहले ही रास्ते में मौजूद फ्यूल स्टेशनों की स्थिति की जानकारी देना है। इससे वे भीड़भाड़ वाले पंपों के बजाय अपनी जरूरत के अनुसार बेहतर स्टेशन चुन सकेंगे।

कुल मिलाकर, AI आधारित तकनीक सीएनजी पंपों पर लगने वाली लंबी कतारों को कम करने और फ्यूल स्टेशनों की कार्यक्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक फायदा तकनीक के व्यापक इस्तेमाल और स्टेशनों पर इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

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Manish Tiwari

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