जनसंपर्क में ‘सुशासन’ की पहल: प्रिंटिंग माफिया पर सख्ती, ‘प्रचार ऐप’ से आउटडोर मीडिया की रीयल-टाइम निगरानी शुरू

रायपुर, 30 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में सरकारी प्रचार-प्रसार व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए जनसंपर्क विभाग ने बड़े प्रशासनिक सुधार लागू किए हैं। विभाग ने एक ओर प्रिंटिंग कार्यों में लंबे समय से चली आ रही अनियमितताओं पर कड़ा प्रहार किया है, वहीं दूसरी ओर आउटडोर मीडिया की निगरानी के लिए तकनीक आधारित “प्रचार ऐप” शुरू किया है।
प्रिंटिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव
सरकारी विभागों में प्रिंटिंग कार्यों को लेकर वर्षों से शिकायतें मिल रही थीं। आरोप थे कि सीमित निजी एजेंसियों को लगातार काम दिए जाने से प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई थी और नियमों का उल्लंघन हो रहा था। हर साल 50 से 60 करोड़ रुपये तक के प्रिंटिंग कार्यों में अनियमितताओं की बात सामने आती रही है।
अब नई व्यवस्था के तहत सभी शासकीय प्रिंटिंग कार्य “संवाद” के माध्यम से ही कराए जाएंगे। यदि किसी विभाग को अन्य एजेंसी से काम कराना है तो पहले “संवाद” से NOC लेना अनिवार्य होगा। बिना NOC के भुगतान नहीं किया जाएगा।
टेंडर प्रक्रिया खत्म, नई नीति तैयार
लगातार शिकायतों के चलते मौजूदा टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया है। विभाग अब एक नई, पारदर्शी और जवाबदेह प्रिंटिंग पॉलिसी तैयार कर रहा है, जिसमें अन्य राज्यों की नीतियों का भी अध्ययन किया जा रहा है।
‘प्रचार ऐप’ से होगी रीयल-टाइम निगरानी
सरकारी योजनाओं के प्रचार में होर्डिंग्स, यूनिपोल्स, डिजिटल वॉल पेंटिंग्स और एलईडी वैन का बड़ा योगदान होता है, लेकिन निगरानी की कमी के कारण गड़बड़ियां सामने आती थीं।
इन समस्याओं को दूर करने के लिए “प्रचार ऐप” विकसित किया गया है, जो तीन चरणों में काम करता है—
- योजना और कार्य आवंटन
- वेंडर्स द्वारा तैयारी
- मैदानी स्तर पर इंस्टॉलेशन
माउंटर्स को अब जियो-टैग्ड और टाइम-स्टैम्प्ड फोटो अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। उन्हें इंस्टॉलेशन से पहले, बाद में और अभियान के दौरान रोज फोटो अपलोड करनी होगी। इससे हर एसेट की अलग-अलग ट्रैकिंग संभव होगी और गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।
1 अप्रैल से लागू, आगे होगा विस्तार
यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से होर्डिंग्स और यूनिपोल्स पर लागू कर दी गई है। जल्द ही इसे एलईडी स्क्रीन, ब्रांडिंग और अन्य माध्यमों तक भी बढ़ाया जाएगा।
जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल ने एजेंसियों के साथ कार्यशाला में स्पष्ट किया कि तकनीक आधारित मॉनिटरिंग से ही पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है।
इस पहल को राज्य में सुशासन और डिजिटल मॉनिटरिंग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।



