2 मार्च को होलिका दहन, लेकिन 4 को खेली जाएगी होली: 3 मार्च को चंद्रग्रहण और सूतक; भद्रा के कारण बदला रंगों का दिन

प्रयागराज। इस वर्ष होली की तिथियों को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि दो मार्च की शाम से लग रही है, ऐसे में होलिका दहन 2 मार्च को होगा। हालांकि इस बार होलिका दहन के अगले दिन यानी 3 मार्च को रंग नहीं खेला जाएगा। रंगों का पर्व 4 मार्च को मनाया जाएगा।
भद्रा और चंद्रग्रहण बना कारण
ज्योतिर्विदों के अनुसार इस वर्ष भद्रा और चंद्रग्रहण के कारण तिथियों में परिवर्तन हुआ है। मान्यता है कि भद्रा काल में होलिका दहन नहीं किया जाता। धर्म ग्रंथों के अनुसार भद्रा के चौथे चरण में दहन संभव होता है, जो 2 मार्च की रात 12:50 बजे से प्रारंभ होगा। इसके बाद ही होलिका दहन किया जाएगा।
वहीं 3 मार्च को चंद्रग्रहण पड़ रहा है। ग्रहण का समय शाम 5:59 बजे से 6:47 बजे तक बताया गया है और यह भारत में दिखाई देगा। चंद्रग्रहण से नौ घंटे पूर्व सूतक काल लग जाता है। सूतक काल में रंग खेलना, मूर्तियों का स्पर्श, भोजन करना और अन्य शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। इसी कारण 3 मार्च को रंगोत्सव नहीं मनाया जाएगा।
पूर्णिमा तिथि का महत्व
होलिका दहन के लिए पूर्णिमा तिथि और रात्रि काल का होना आवश्यक है। पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम 5:18 बजे से शुरू होकर 3 मार्च की शाम 4:33 बजे तक रहेगी। इसलिए शास्त्रसम्मत रूप से 2 मार्च की रात्रि में होलिका दहन किया जाएगा।
होली पर इन वस्तुओं का दान वर्जित
आचार्यों के अनुसार होली के दिन दूध, दही, चीनी, कपड़े, सरसों का तेल, लोहे, स्टील और कांच की वस्तुओं का दान नहीं करना चाहिए।
इस तरह इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को और रंगों की होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।



