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गाइडलाइन दरों में बड़े जनहितैषी सुधार: वित्त मंत्री ओपी चौधरी की बड़ी घोषणाएँ, आम जनता और रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी राहत

रायपुर, 08 दिसंबर 2025/ राज्य सरकार ने गाइडलाइन दरों में बड़े और ऐतिहासिक सुधार करते हुए आम नागरिकों, किसानों, मध्यम वर्ग और रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी राहत देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में पंजीयन प्रक्रिया को सरल, सुगम और जनहितैषी बनाने की दिशा में ये कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने बताया कि 20 नवंबर को लागू गाइडलाइन दरों में प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करते हुए व्यापक सुधार किए गए हैं, जिनका लाभ पूरे प्रदेश के लोगों को मिलेगा। केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा जारी ये नए प्रावधान 8 दिसंबर से प्रभावशील हो गए हैं।


नगरीय क्षेत्रों में बड़े बदलाव: स्लैब सिस्टम फिर लागू

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि नगरीय क्षेत्र में 1400 वर्गमीटर तक भूमि पर लागू इंक्रीमेंटल गणना प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है। अब फिर से पहले की तरह—

  • नगर निगम में 50 डिसमिल तक,
  • नगर पालिका में 37.5 डिसमिल तक,
  • नगर पंचायत में 25 डिसमिल तक
    स्लैब दर से मूल्यांकन लागू होगा।

बहुमंजिला भवनों में भी अब सुपर बिल्ट-अप एरिया के बजाय बिल्ट-अप एरिया के आधार पर मूल्यांकन होगा। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों को किफायती दरों पर फ्लैट उपलब्ध होंगे। इसके साथ:

  • बेसमेंट और प्रथम तल पर 10% की कमी,
  • दूसरे तल और उससे ऊपर के तल पर 20% की कमी से मूल्यांकन किया जाएगा।

20 मीटर दूरी पर स्थित कमर्शियल संपत्तियों को 25% राहत

कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में मुख्य मार्ग से 20 मीटर के बाद स्थित संपत्ति के लिए 25% कम दर से मूल्यांकन होगा।

साथ ही जिला मूल्यांकन समितियों को 31 दिसंबर तक पुनरीक्षित दरों के प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।


गाइडलाइन दरों में किए गए 11 बड़े जनहितैषी सुधार

1. नजूल, आबादी और परिवर्तित भूमि पर कृषि भूमि जैसे प्रावधान लागू

पहले इन पर वर्गमीटर दर लागू होती थी। अब हेक्टेयर दर लागू होगी।
लाभ:
रायपुर के हेमू कल्याणी वार्ड में 1 एकड़ भूमि का मूल्य 78 करोड़ से घटकर 2.4 करोड़ हो गया।


2. ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तित भूमि पर सिंचित भूमि का ढाई गुना मूल्य लागू करने की व्यवस्था समाप्त

लाभ:
बिलासपुर के सेंदरी में 1 एकड़ भूमि का मूल्य 4 करोड़ से घटकर 1.60 करोड़ हो गया।


3. दो फसली भूमि पर 25% अतिरिक्त जोड़ने का प्रावधान हटाया गया

लाभ:
मोतीपुर में 1 हेक्टेयर भूमि का मूल्य 3.05 करोड़ से घटकर 2.44 करोड़ हुआ।


4. ट्यूबवेल, बोरवेल और कुएं पर अतिरिक्त लागत खत्म

  • ट्यूबवेल/बोरवेल पर 85,000 रु
  • कुएं पर 70,000 रु
    पहले जोड़े जाते थे, अब समाप्त।

5. केला, पपीता, गन्ना जैसी फसलों पर 25% अतिरिक्त मूल्य की व्यवस्था खत्म


6. जमीन में मौजूद पेड़ों का मूल्य जोड़कर मूल्यांकन पूरी तरह समाप्त

बड़ा लाभ:
पेड़ काटने की प्रवृत्ति रुकेगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा।
कांकेर में एक मामले में खरीदार को 8.58 लाख रजिस्ट्री शुल्क की राहत मिली।


7. शहर से लगे गांवों में कृषि भूमि का मूल्यांकन अब केवल हेक्टेयर दर से

लाभ:
बरौदा (रायपुर) में 37.5 डिसमिल भूमि का मूल्य 26.75 लाख से घटकर 6.30 लाख हुआ।


8. तालाब/फिश टैंक होने पर भूमि दर का 1.5 गुना का नियम समाप्त


9. ग्रामीण कृषि भूमि पर अब केवल दो दरें — मुख्य मार्ग और सिंचित भूमि

असिंचित भूमि का मूल्य सिंचित दर से 20% कम होगा।


10. बाउंड्री वॉल और प्लिंथ लेवल की अतिरिक्त लागत का प्रावधान खत्म


11. नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत की 21 प्रकार की दरें खत्म — अब केवल 2 दरें

गणना आसान, पारदर्शिता बढ़ेगी और आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।


प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहे नेता और पदाधिकारी

अखिलेश सोनी, भूपेंद्र सवन्नी, अमित चिमनानी, शताब्दी पांडेय, किरण बघेल, उज्ज्वल दीपक सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।


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Manish Tiwari

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