बैगा-गुनिया-हड़जोड़ परंपरा को मिलेगा सम्मान : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोषणा पर अमल, हर चिन्हित व्यक्ति को मिलेगा 5 हजार रुपए वार्षिक प्रोत्साहन

रायपुर, 07 नवम्बर 2025 — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोषणा पर राज्य सरकार ने “मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना (अनुसूचित जनजाति) वर्ष 2025” को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। इस योजना के तहत अनुसूचित जनजाति वर्ग के बैगा, गुनिया और हड़जोड़ परंपरा से जुड़े चिन्हित व्यक्तियों को प्रति वर्ष 5,000 रुपए की सम्मान सह-प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। आदिम जाति विकास विभाग ने 6 नवम्बर को इस संबंध में विस्तृत अधिसूचना जारी की है।
मुख्यमंत्री ने जनजातीय गौरव दिवस 15 नवम्बर 2024 के अवसर पर यह घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य पारंपरिक वनौषधीय चिकित्सा पद्धति से जुड़े व्यक्तियों के योगदान को मान्यता देना और उनकी आजीविका को सुदृढ़ बनाना है।
अधिसूचना के अनुसार, योजना का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के अंतर्गत बैगा, गुनिया एवं हड़जोड़ समुदायों के पारंपरिक औषधीय ज्ञान को सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों तक हस्तांतरित करना है।
पात्रता और चयन प्रक्रिया
- ऐसे व्यक्ति जो कम से कम 30 वर्षों से अपने स्थानीय क्षेत्र में बैगा, गुनिया या हड़जोड़ के रूप में सेवा दे रहे हैं तथा जिनके परिवार में दो पीढ़ियों से वनौषधीय चिकित्सा का ज्ञान हस्तांतरित हुआ है, पात्र माने जाएंगे।
- पात्रों में स्त्री, पुरुष और तृतीय लिंग (ट्रांसजेंडर) व्यक्ति भी शामिल होंगे।
- चयन ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की अनुशंसा से किया जाएगा।
- अनुशंसित नामों का परीक्षण जनपद स्तर की समिति द्वारा किया जाएगा, जिसमें जनपद अध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति वर्ग के सदस्य, सीईओ जनपद पंचायत और मंडल संयोजक शामिल होंगे।
- अंतिम सूची आयुक्त, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास कार्यालय को भेजी जाएगी और जिला कलेक्टर द्वारा सहायता राशि वितरित की जाएगी।
- सम्मान प्राप्त करने वाले व्यक्तियों की सूची संबंधित ग्राम सभा में सार्वजनिक रूप से पढ़ी जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा —
“छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपराएं हमारे सांस्कृतिक वैभव और प्राचीन ज्ञान का जीवंत प्रतीक हैं। बैगा, गुनिया और हड़जोड़ हमारे समाज के वे सम्मानित जन हैं जिन्होंने सदियों से वनौषधीय चिकित्सा की लोकपरंपरा को जीवित रखा है। उनकी इस अनमोल सेवा को सम्मान देने के लिए यह योजना प्रारंभ की गई है, ताकि उनका ज्ञान संरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे।”
यह पहल राज्य सरकार की जनजातीय गौरव और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



