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फ्लोरामैक्स घोटाला : कोरबा में 40 हजार महिलाओं से अरबों की ठगी — राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने लिया संज्ञान, 30 दिनों में रिपोर्ट तलब

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में फ्लोरामैक्स कंपनी द्वारा 40 हजार महिलाओं से अरबों रुपए की धोखाधड़ी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस बड़े घोटाले पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से जांच रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराई जाए और दोषियों की संपत्ति जब्त कर पीड़ित महिलाओं का पैसा वापस कराया जाए।

आयोग ने छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को पत्र जारी कर 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी देने को कहा है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह मामला गंभीर वित्तीय अनियमितता और अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिलाओं के आर्थिक शोषण से जुड़ा है, इसलिए इसे अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज किया जाए और मामले को समयबद्ध तरीके से सुलझाया जाए।

ननकीराम कंवर ने उठाया था मुद्दा
गौरतलब है कि पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने 9 दिसंबर 2024 को फ्लोरामैक्स कंपनी की धोखाधड़ी का मामला राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष उठाया था। उन्होंने शिकायत में बताया था कि कंपनी ने ग्रामीण महिलाओं को झांसा देकर 30-30 हजार रुपए का लोन निकलवाया और करीब 120 करोड़ रुपए की भारी भरकम रकम हड़प ली। उन्होंने मांग की थी कि इस मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए और पीड़ित महिलाओं को राहत दिलाई जाए।

13 गिरफ्तार, 10 को मिली जमानत
मामले की जांच में बिलासपुर संभाग आयुक्त सुनील कुमार जैन ने आयोग को बताया कि फ्लोरामैक्स कंपनी के संचालक अखिलेश सिंह सहित 13 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से 10 को जमानत मिल चुकी है। जांच अधिकारी आरोपियों की संपत्तियों का पता लगाकर पीड़ित महिलाओं का पैसा वापस दिलाने की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं। कुछ संपत्तियां बरामद भी की जा चुकी हैं।

आयोग ने कहा है कि राज्य शासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस गंभीर वित्तीय अपराध के सभी आरोपी कानून के शिकंजे में आएं और पीड़ित आदिवासी महिलाओं को शीघ्र न्याय और आर्थिक राहत मिल सके।

(समाप्त)

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Manish Tiwari

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