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हरिशंकर तिवारी पर 7 बैंकों का 1129 करोड़ बकाया… रेलवे के ठेकों ने बनाया धनपति, सरकारों के निशाने पर भी रहे

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 1980 से लेकर 2000 तक एक नाम खासी चर्चा में रहा। वह नाम था हरिशंकर तिवारी का। हरिशंकर तिवारी ने 70 के दशक में अपने प्रभाव को बढ़ाना शुरू किया था। इसके बाद वे राजनीति में बाहुबल का प्रतीक बनकर उभरे। आम लोगों और पीड़ितों के लिए खड़े होकर उन्होंने समाज में अपना दबदबा बनाया। गोरखपुर मठ के समानांतर तिवारी का हाता बनाकर अपनी शक्ति का परिचय दिया। उनकी संपत्ति को लेकर कई प्रकार के दावे किए जाते रहे हैं। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर वे चिल्लूपार विधानसभा सीट से उम्मीदवारी पेश की थी। चुनावी हलफनामे में हरिशंकर तिवारी ने एक करोड़ 64 लाख पांच हजार रुपए की संपत्ति की घोषणा की थी।

वर्ष 2020 में हरिशंकर तिवारी सीबीआई छापे के बाद चर्चा में आए थे। हरिशंकर तिवारी, बड़े बेटे संतकबीरनगर से पूर्व सांसद भीष्मशंकर तिवारी और पूर्व बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी पर तब सात बैंकों के 1129 करोड़ रुपए के बकाए का मामला सामने आया था। इसका ब्योरा डेबिट रिकवरी ट्रिब्यूनल की ओर से जारी किया गया था। डीआरटी के मुताबिक, मैसर्स गंगोत्री इंटरप्राइजेज लिमिटेड और अन्य फर्म ने अलग-अलग बैंकों से कर्ज लिया। उन पर सबसे अधिक कर्ज बैंक ऑफ इंडिया का 283.22 करोड़, आईडीबीआई का 216.43 करोड़ और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के 117.66 करोड़ रुपए का बकाया दिखाया गया है।

हरिशंकर तिवारी परिवार पर केनरा बैंक के 142.49 करोड़, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के 100.44 करोड़, कॉरपोरेशन बैंक 166.21 करोड़ और एक्सिस बैंक 102.99 करोड़ रुपए का कर्ज शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऋण की धनराशि 455.66 करोड़ और बैंक गारंटी 673.78 करोड़ रुपए है। बैंकों की ओर से वसूली के लिए उनके खिलाफ बार-बार समन जारी किया जाता रहा है।

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Manish Tiwari

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