
-मप्र के विभिन्न क्षेत्रों से महुआ भेजा जा रहा इंग्लैंड
भोपाल : सोमवार, जुलाई 31, 2023। नशीली शराब से मदहोश बना देने वाले महुए से अब तरोताजगी, चुस्ती फुर्ती लाने वाली ग्रीन टी यानी चाय भी बन रही है। यह चाय हिंदुस्तान ही नही इंगलिस्तान यानि इंग्लैंड तक धूम मचा रही है। मध्यप्रदेश के बैतूल समेत नौ जिलों से इसके लिए इंग्लैंड महुआ भेजा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, हाई फूड क्वालिटी का यह महुआ बैतूल के जंगलों से आदिवासियों के हाथों चुनवाया जा रहा है। अपनी ठंडी आबो हवा में अंग्रेज इस महुए से बनी चाय का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं।
आमतौर पर आदिवासी महुआ को सड़ाकर उसकी शराब बनाते हैं। जिसे शादी,तीज त्यौहारों में उपयोग किया जाता है। कई इलाकों में यह अवैध रूप से बेची भी जाती है। लेकिन अब इस महुआ के नए उपयोग ने इसके बेहतर इस्तेमाल के विकल्प खोल दिए हैं।
सबसे ज्यादा सुखद यह है कि जिस महुए की कीमत आदिवासियों को बाजार में 30 से 35 रु किलो मिल रही है। इस ग्रीन टी वाले कांसेप्ट के बाद वह बढक़र तीन गुना ज्यादा यानि 110 रुपए किलो हो जाएगी। लंदन बेस्ड कंपनी ओ फॉरेस्ट इसे 110 रुपए किलो खरीद रही है। जानकार बताते हैं कि बैतूल से लंदन भेजा जा रहा महुआ पूरे देश में दूसरे नंबर पर आता है। इसकी गुणवत्ता और तादाद अन्य जिलों से ज्यादा है। यही वजह है की यहां से सौ टन महुआ भेजे जाने का अंग्रेज कंपनी ने अनुबंध किया है।
1250 महुए के पेड़ों का चयन किया
बैतूल जिले के दक्षिण वन मंडल में वन विभाग ने 1250 महुए के पेड़ों का चयन किया है। इनकी जीपीएस लोकेशन लेकर इन पेड़ों को 71 हितग्राहियों में बांट दिया गया है। ये पेड़ कुछ तो जंगली क्षेत्र में है तो कुछ पेड़ आदिवासियों के खेतों में। वन विभाग इन्हीं 71 आदिवासियों से फिलहाल महुआ खरीद रहा है। इस साल इन लोगों से 1870 किलो महुआ खरीदा गया है। जिसकी इंग्लैंड की कंपनी ने बकायदा यहां पहुंचकर टेस्टिंग भी की है। टेस्टिंग के लिहाज से यह बहुत बेहतर ग्रेड का पाया गया है।
नेट बिछाकर करते हैं संकलन
वन विभाग ने सभी हितग्राहियों को हरी नेट उपलब्ध कराई है। इस नेट को महुआ के पेड़ के नीचे फैलाकर बांध दिया जाता है। इस नेट में गिरने वाले महुआ को आदिवासी प्रतिदिन इक_ा करते हैं। नेट पर एकत्रित होने के कारण इस पर न तो धूल लगती है और न ही यह खराब होता है। एक पेड़ से हर हितग्राही 80 से 100 किलो महुआ एकत्रित करता है। अच्छे सीजन में यह और भी अधिक मात्रा में मिल जाता है। एकत्रित किए जाने वाले इस महुआ को प्लास्टिक सीट पर रखकर उस पर एक अन्य सीट रखकर सुखा लिया जाता है। करीब एक सप्ताह सुखाने के बाद इसे प्लास्टिक बैग्स में पैक कर दिया जाता है।
मंडला में किया जा रहा एकत्रित
बैतूल से संकलित किया गया यह महुआ मंडला भेजा जा रहा है। जहां अन्य नौ जिलों से भी महुआ भेजा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश के हरदा, नर्मदापुरम, सीधी, उमरिया, अलीराजपुर, मंडला भी इकट्?ठा कर यह महुआ इंग्लैंड के लिए भेजा जा रहा है। जहां से यह छत्तीसगढ़ के जरिए ओ फॉरेस्ट कंपनी को सौंप दिया जाएगा। जो इसे इंग्लैंड भेजेगी। खास बात यह है की इस महुआ का ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन भी किया गया है। इसके लिए भोपाल में आयोजित वन मेले में कंपनी से अनुबंध किया गया था।
इससे बिस्किट बनाने की योजना
दक्षिण वन मंडल के डीएफओ विजयनानतम टी आर बताते है कि ग्रीन टी के इस कांसेप्ट से महुए की अच्छी कीमत मिलेगी। जो आदिवासियों के जीवन स्तर को उठाने में मील का पत्थर साबित होगा। यहां मिलने वाले फूड ग्रेड महुए की कीमत कंपनी से 110 रुपए किलो मिल रही है। जिसमें से परिवहन, संकलन के खर्चे काटकर आदिवासियों को 94 रुपए प्रति किलो की दर से भुगतान किया जाएगा। जबकि अब तक उन्हें महज 30 रुपए किलो बाजार से मिल रहा था। आने वाले समय में इससे बिस्किट बनने की भी योजना है। जिसकी डिमांड आने पर महुए की मांग बढ़ जाएगी।
बस्तर से हुई थी शुरुआत
बस्तर में रहने वाली रजिया शेख ने इससे महुआ टी बनाया और जगदलपुर शहर में महुआ टी का स्टॉल लगाया था। रजिया शेख ने बताया कि बस्तर में जगदलपुर शहर और अन्य जिलों में भी महुआ टी के छोटे-छोटे स्टॉल लगाए गए हैं। जहां लोगों का काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। वहीं ऑनलाइन भी महुआ टी उपलब्ध होगी। जिसे आसानी से भारत के साथ ही विदेशों में रहने वाले लोग भी महुआ टी का लुफ्त उठा सकेंगे। महुआ टी पेपर पैकेट में पैक कर दिया जा रहा है। किसी तरह के प्लास्टिक का यूज नहीं किया जा रहा है और 100 ग्राम की महुआ टी की चाय की कीमत 60 रुपये रखी गई है और एक पैकेट से 7 से 8 बार चाय बनाई जा सकती है। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद महुआ से चाय तैयार की जा रही है। जिसको अच्छा रिस्पांस भी स्थानीय लोगों के साथ दूर दराज से बस्तर घूमने आने वाले पर्यटक दे रहे हैं।



