जीवन में आत्मसात करें श्रीमद्भागवत कथा के प्रसंग’: सतीश गुप्ता और वीणा गुप्ता के विवाह की 50 वीं वर्षगांठ पर वृंदावन में श्री मद्भागवत कथा यान यज्ञ का आयोजन

रायपुर।श्री राधाकृष्ण धाम, छटीकरा रोड, वृंदावन में 21 से 28 जनवरी 2024 तक श्री मद्भागवत कथा यान यज्ञ का आयोजन किया गया। रायपुर के न्यू शांतिनगर निवासी गुप्ता (कंदेले) परिवार की ओर से आयोजित इस धार्मिक महोत्सव में छत्तीसगढ़ के अलावा देशभर से भक्त सैकड़ों की संख्या में पहुंचे थे। छत्तीसगढ़ सरकार के कॉर्मस एंड इंडस्ट्रीज डिपार्टमेंट के एडिशनल डायरेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए सतीश गुप्ता और उनकी पत्नी वीणा गुप्ता के विवाह की 50 वीं वर्षगांठ के मौके पर हो रहे श्री मद्भागवत कथा यान यज्ञ के कथा व्यास आचार्य श्री अंशुमान व्यास जी महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि जब-जब भी धरती पर आसुरी शक्ति हावी हुईं, परमात्मा ने धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेकर पृथ्वी पर धर्म की स्थापना की। भागवत के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए कथा व्यास आचार्य श्री अंशुमान व्यास जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जन्म लेकर भी जो व्यक्ति पाप के अधीन होकर इस भागवत रुपी पुण्यदायिनी कथा को श्रवण नहीं करते तो उनका जीवन ही बेकार है। जिन लोगों ने इस कथा को सुनकर अपने जीवन में इसकी शिक्षाएं आत्मसात कर ली हैं तो मानों उन्होंने अपने पिता, माता और पत्नी तीनों के ही कुल का उद्धार कर लिया है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन है। ये कथा बड़े भाग्य से सुनने को मिलती है। इसलिए जब भी समय मिले कथा में सुनाए गए प्रसंगों को सुनकर अपने जीवन में आत्मसात करें। इससे मन को शांति भी मिलेगी और कल्याण होगा।


श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन कलश यात्रा के बाद मंत्रोच्चार के साथ पंचांग पूजन हुआ। मुख्य यजमान सतीश गुप्ता और वीणा गुप्ता ने श्रीमद् भागवत जी का पूजन कर ठाकुर जी का आशीर्वाद प्राप्त किया। तत्पश्चात श्रीमद्भागवत कथा व्यास श्री अंशुमान व्यास जी महाराज ने अमृतमयी वाणी से श्रीमद् भागवत महात्म्य के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस कलयुग में मनुष्य अपने भावों को सत्संग के जरिए ही स्थिर रख सकता है। सत्संग के बिना विवेक उत्पन्न नहीं हो सकता और बिना सौभाग्य के सत्संग सुलभ नहीं हो सकता। श्री अंशुमान व्यास जी महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को भागवत का महत्व समझना चाहिए। भागवत अमृत रूपी कलश है। जिसका रसपान करके आदमी अपने जीवन को कृतार्थ कर लेता है। इसलिए जहां भी भागवत होती है। श्रीमद्भागवत कथा व्यास श्री अंशुमान व्यास जी महाराज ने कहा कि अहंकार, गर्व, घृणा और ईष्र्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। यदि हम संसार में पूरी तरह मोहग्रस्त और लिप्त रहते हुए सांसारिक जीवन जीते है तो हमारी सारी भक्ति एक दिखावा ही रह जाएगी। यदि संसार में ये आसक्ति है, तो दु:ख का कारण बन जाती है। यही आसक्ति भगवान और उनमें भक्ति में हो जाए तो मोक्ष का द्वार खुल जाता है।
‘अपनी कुल धर्म और मर्यादा का पालन करें’
सतीश गुप्ता और वीणा गुप्ता के विवाह के 50 वर्ष पूरे होने पर वृंदावन में आयोजित श्री मद्भागवत कथा यान यज्ञ के दौरान उत्सव का माहौल बन गया। भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लेकर सभी ने उन्हें आगे भी सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर श्री मद्भागवत कथा यान यज्ञ कथा व्यास श्री अंशुमान व्यास जी महाराज ने कहा कि 84 लाख योनियां भुगतने के पश्चात मानव देह की प्राप्ति होती है। इसलिए इस देह को उपयोग व्यर्थ कामों मे ना करके जनकल्याण व ईश्वर भक्ति में समर्पित कर दें। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं जानते थे कि वह परमात्मा हैं उसके बाद भी वह अपने माता पिता के चरणों को प्रणाम करने में कभी संकोच नहीं करते थे। यह सीख में भगवान श्रीकृष्ण से सभी को लेनी चाहिए। आज की युवा पीढ़ी धन कमाने में लगी हुई है लेकिन अपनी कुल धर्म और मर्यादा का पालन बहुत कम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है।
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