‘आसमान में जंग और नीचे दहशत’—रायपुर का रुद्रांश 3 महीने होर्मुज में फंसा, ड्रोन मलबा गिरा तो कांप उठा पूरा जहाज

रायपुर, 11 जून 2026। Raipur के रहने वाले मर्चेंट नेवी ऑफिसर रुद्रांश चौबे ने ऐसा खौफनाक अनुभव झेला, जिसे वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे। एक कार्गो शिप पर असिस्टेंट कैप्टन और चीफ ऑफिसर के रूप में काम करते हुए वे लगभग 3 महीने तक Strait of Hormuz में फंसे रहे, जहां तनाव के बीच मिसाइलें, ड्रोन और फाइटर जेट लगातार सक्रिय थे।
यह पूरा घटनाक्रम उस समय का है जब Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव ने समुद्री रास्तों को बेहद संवेदनशील बना दिया था।
जहाज के ऊपर से गुजरती थीं मिसाइलें और ड्रोन
रुद्रांश चौबे के मुताबिक, जैसे ही सायरन बजता था, जहाज पर मौजूद 22 क्रू मेंबर तुरंत इंजन रूम में जाकर छिप जाते थे। कई बार मिसाइलें और ड्रोन जहाज के बेहद करीब से गुजरते थे, जिससे हर पल जान का खतरा बना रहता था।
एक घटना में ड्रोन का मलबा भी जहाज पर आकर गिरा, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ गई।
90 दिन तक समुद्र में फंसा रहा जहाज
रुद्रांश ने बताया कि वे कार्गो डिलीवरी के लिए होर्मुज पहुंचे थे, लेकिन अचानक तनाव बढ़ने के कारण समुद्री मार्ग प्रभावित हो गया। इसके बाद जहाज को एंकर पर रोकना पड़ा और टीम लंबे समय तक वहीं फंसी रही।
इस दौरान जहाज पर काम चलता रहा, लेकिन हर दिन अनिश्चितता और डर के बीच गुजरता था।
जीपीएस स्पूफिंग और कम्युनिकेशन की चुनौती
ऑफिसर के अनुसार, इस दौरान सबसे बड़ी समस्या तकनीकी थी। जीपीएस स्पूफिंग और नेटवर्क बाधाओं के कारण कई बार 4–5 दिन तक घरवालों से संपर्क नहीं हो पाता था।
सैटेलाइट कम्युनिकेशन से किसी तरह छोटे संदेश भेजकर अपनी सुरक्षित स्थिति की जानकारी दी जाती थी।
22 क्रू मेंबर्स ने मिलकर हिम्मत बनाए रखी
जहाज पर मौजूद सभी क्रू मेंबर्स ने एक-दूसरे का मनोबल बनाए रखा। रुद्रांश ने बताया कि उन्होंने डर के बजाय काम पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति अपनाई, जिससे तनाव को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सका।
6 महीने के कॉन्ट्रैक्ट के बाद सुरक्षित निकासी
लगभग 6 महीने का कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के बाद कंपनी ने स्पेशल सर्विस बोट भेजकर सभी क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकाला। इसके बाद वे दुबई पहुंचे और फिर हवाई मार्ग से अपने घर लौटे।
परिवार से संपर्क ही सबसे बड़ी ताकत रहा
रुद्रांश ने कहा कि इस पूरे दौरान परिवार से लगातार संपर्क बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। कठिन परिस्थितियों में भी घरवालों को अपनी सुरक्षा की जानकारी देते रहना जरूरी था।
“ऐसा अनुभव कभी नहीं भूल सकता”
उन्होंने कहा कि यह अनुभव जीवन का सबसे कठिन समय था, लेकिन टीमवर्क, अनुशासन और सुरक्षा नियमों के पालन ने सभी को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की।



