पेयजल संकट निवारण के लिए नगरीय प्रशासन विभाग सख्त : सभी निकायों को एक सप्ताह में मरम्मत व सुधार कार्य पूर्ण करने के निर्देश

रायपुर, 9 मई 2026। ग्रीष्मकाल में संभावित पेयजल संकट को देखते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्य के सभी नगरीय निकायों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को हैंडपंप, बोरवेल तथा अन्य जलप्रदाय प्रणालियों की एक सप्ताह के भीतर जांच कर आवश्यक मरम्मत सुनिश्चित करने को कहा है।
जारी परिपत्र में कहा गया है कि पाइपलाइन में लीकेज, टूट-फूट को तत्काल सुधारा जाए तथा नालियों से होकर गुजरने वाली पाइपलाइनों एवं हाउस सर्विस कनेक्शनों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर प्याऊ घर स्थापित कर पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव द्वारा हाल ही में की गई समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद विभाग ने यह कदम उठाया है। उन्होंने गर्मी के दौरान निर्बाध एवं समुचित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया था।
विभाग ने सभी निकायों में नोडल अधिकारी नियुक्त कर प्रतिदिन शिकायतों की समीक्षा और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने को कहा है। हैंडपंपों के जल को कीटाणुरहित करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर एवं सोडियम हाइपोक्लोराइड का उपयोग, तथा जल में क्लोरीन की नियमित जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।
इसके अलावा जल शोधन संयंत्रों, उच्च स्तरीय जलागारों और संपवेल की सफाई व डिसइन्फेक्शन को अनिवार्य किया गया है। बस स्टैंड, बाजार और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर प्याऊ घरों के संचालन के साथ मानव संसाधन उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
विभाग ने जल आवर्धन योजनाओं और अमृत मिशन के लंबित कार्यों को 15 दिनों में पूर्ण कर तत्काल जल आपूर्ति प्रारंभ करने को कहा है। साथ ही पशुधन के लिए भी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा तालाबों में जल भराव हेतु संबंधित विभागों से समन्वय के निर्देश दिए गए हैं।
भूजल स्तर सुधार के लिए नलकूपों और बोरवेल के आसपास रेन वॉटर हार्वेस्टिंग एवं रिचार्ज पिट निर्माण को भी अनिवार्य किया गया है। विभाग ने जल संरक्षण को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाने और जल के दुरुपयोग पर रोक लगाने पर जोर दिया है।



