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देश के सबसे बड़े पोल्ट्री कॉन्क्लेव का रायपुर में हुआ आगाज, गांवों के सरपंचों ने आईबी ग्रुप से रखी फार्म स्थापना की मांग

रायपुर, 07 अप्रैल 2025 राजधानी रायपुर में आज देश के सबसे बड़े पोल्ट्री कॉन्क्लेव का शुभारंभ हुआ। प्रेस क्लब रायपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में आईबी ग्रुप के एमडी बहादुर अली ने मीडिया को संबोधित करते हुए इस आयोजन की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर कंपनी की डायरेक्टर जोया आफरीन आलम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

बहादुर अली ने बताया कि इस दो दिवसीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर पोल्ट्री व्यवसाय को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा, “गांव में रहकर गांव का विकास करना ही हमारा मकसद है। जब हमारे साथ जुड़े लोग आगे बढ़ेंगे, तभी हमारा देश भी आगे बढ़ेगा।”

उन्होंने आगे बताया कि आईबी ग्रुप का लक्ष्य 2035 तक भारत को विकसित पोल्ट्री राष्ट्र बनाना है। इसके जरिए न केवल देश में प्रोटीन की कमी को दूर किया जाएगा, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि कंपनी “सुनहरा कल” और “अस्मिता योजना” जैसे कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बना रही है।

गांवों में जागरूकता, रोजगार की उम्मीद

बहादुर अली ने बताया कि अब तक दस गांवों के सरपंचों ने कंपनी से संपर्क कर अपने गांवों में फार्म खोलने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा, “एक फार्म लगने से 300 से 500 लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलता है। इससे पलायन रुकता है, गांव में दुकानें और ट्रांसपोर्ट जैसी गतिविधियाँ बढ़ती हैं, और जमीन की कीमतों में भी इजाफा होता है।”

छत्तीसगढ़ को प्रोटीन हब बनाने की पहल

आईबी ग्रुप द्वारा सोया चंक्स के उत्पादन से वेज प्रोटीन को बढ़ावा दिया जा रहा है। बहादुर अली ने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश का पहला प्रोटीन हब बनाने का सपना जल्द साकार होगा। उन्होंने मीडिया को रायपुर के होटल ओगाया में आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम को कवर करने का निमंत्रण भी दिया।

आईबी ग्रुप की देशभर में 20% हिस्सेदारी

फिलहाल भारत के पोल्ट्री उद्योग में आईबी ग्रुप की 20% भागीदारी है और कंपनी का लक्ष्य इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50% तक ले जाने का है। कंपनी न केवल व्यापार करती है, बल्कि फार्मरों और उनके परिवारों के विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है।

मक्के की खेती को मिल सकता है बढ़ावा

आईबी ग्रुप का मानना है कि आने वाले समय में धान के बाद छत्तीसगढ़ में मक्के की खेती को दूसरी प्रमुख फसल के रूप में अपनाया जाएगा। मक्का कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली नगद फसल है, जिससे किसानों को आर्थिक मजबूती मिल सकती है।

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Manish Tiwari

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