CG में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 लागू: जबरन धर्मांतरण पर सख्ती, सामूहिक मामलों में उम्रकैद और 25 लाख तक जुर्माना

रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 लागू कर अवैध धर्मांतरण पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे सामाजिक संतुलन और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए “मील का पत्थर” बताया है।
इस नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति प्रलोभन, दबाव या धोखाधड़ी से धर्मांतरण कराता है, तो उसे 3 से 10 साल तक की सजा और 1 से 5 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। वहीं सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा उम्रकैद तक बढ़ाई जा सकती है, साथ ही न्यूनतम 25 लाख रुपये जुर्माना तय किया गया है।
कमजोर वर्गों के लिए खास सुरक्षा
कानून में महिलाओं, नाबालिगों और SC/ST वर्ग के लिए विशेष सुरक्षा दी गई है। इन मामलों में दोषी पाए जाने पर 10 से 20 साल की सजा और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान रखा गया है।
धर्म परिवर्तन के लिए अनिवार्य प्रक्रिया
- धर्म परिवर्तन से पहले 60 दिन पहले नोटिस देना होगा
- परिवर्तन के बाद 21 दिनों के भीतर रिपोर्टिंग जरूरी
- धर्मांतरण कराने वाले पर यह साबित करने की जिम्मेदारी होगी कि यह स्वेच्छा से हुआ है
- सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यम से होने वाले धर्मांतरण भी कानून के दायरे में
शादी के लिए धर्म परिवर्तन भी निगरानी में
यदि केवल विवाह के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन किया गया है और निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो उसे भी अवैध माना जाएगा।
6 महीने में होगा फैसला
- जांच सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी करेंगे
- मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में होगी
- 6 महीने के भीतर निर्णय देने का लक्ष्य
सरकार का दावा
सरकार का कहना है कि यह कानून आदिवासी और कमजोर वर्गों को संरक्षण, सांस्कृतिक पहचान की रक्षा और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए लाया गया है।
क्या होगा असर?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कानून
- अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाएगा
- सामाजिक तनाव कम करने में मदद कर सकता है
- लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी
👉 कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ का यह नया कानून देशभर में चर्चा का विषय बन गया है और इसे एक मॉडल कानून के रूप में भी देखा जा रहा है।



