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हसदेव में नई कोल माइन का विरोध: टीएस सिंह देव ने FAC से कहा- ‘रामगढ़ और 7 लाख पेड़ों को बचाइए’

अम्बिकापुर। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (FAC) की 8 मई को नई दिल्ली में होने वाली बैठक से पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंह देव ने हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को वन स्वीकृति नहीं देने की मांग उठाई है। उन्होंने FAC सदस्यों से फोन पर चर्चा कर ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से कई दस्तावेज भेजे हैं।

सिंह देव ने कहा कि राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित और अदानी के एमडीओ वाले इस कोल ब्लॉक के लिए लगभग 1,742 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग किया जाएगा, जिससे करीब 7 लाख पेड़ों की कटाई होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे हसदेव अरण्य के घने जंगल, जैव विविधता, हसदेव नदी और बांगो जलाशय को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।

उन्होंने FAC को भेजे दस्तावेजों में कहा कि खनन गतिविधियों के कारण ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ियों में पहले ही दरारें पड़ चुकी हैं। यह क्षेत्र भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक है। सिंह देव का दावा है कि रिपोर्ट में रामगढ़ पहाड़ियों की दूरी गलत तरीके से 10 किलोमीटर से अधिक दर्शाई गई, जबकि वास्तविक एरियल दूरी लगभग 8 किलोमीटर है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पहाड़ियों को नुकसान पहुंचा तो प्राचीन गुफाएं और मंदिर भी नष्ट हो सकते हैं।

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून की 2021 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में PEKB-I को छोड़कर बाकी नई खदानों, विशेषकर केते एक्सटेंशन, को “नो-गो एरिया” घोषित करने की सिफारिश की गई थी। वहीं ICFRE की रिपोर्ट में भी ‘चोरनाई वाटरशेड’ क्षेत्र में खनन रोकने का सुझाव दिया गया है। उन्होंने बताया कि केते एक्सटेंशन का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी महत्वपूर्ण जलग्रहण क्षेत्र में आता है।

सिंह देव ने कहा कि यह इलाका हाथियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आवास क्षेत्र है और लेमरू हाथी अभ्यारण्य के बफर ज़ोन में आता है। उनके अनुसार, वर्ष 2014 के बाद से खनन गतिविधियों के कारण मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने हसदेव अरण्य में नई कोयला खदानों के विरोध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में वन विभाग द्वारा दिए गए हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान PEKB खदान में ही लगभग 350 मिलियन टन कोयला भंडार शेष है, जो अगले 20 वर्षों तक 4340 मेगावाट क्षमता वाले बिजली संयंत्रों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त बताया गया है।

टीएस सिंह देव ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे गए दस्तावेजों की प्रतियां भी साझा करते हुए ऐतिहासिक रामगढ़ स्थल के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि FAC इन तथ्यों पर गंभीरता से विचार कर रामगढ़ और हसदेव अरण्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

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Manish Tiwari

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