बिलासपुर हाईकोर्ट का अहम आदेश : जिंदल स्टील पर 153 करोड़ रिकवरी नोटिस स्थगित, दो महीने में नई सुनवाई के निर्देश

बिलासपुर, 03 जून 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जिंदल स्टील लिमिटेड को बड़ी राहत देते हुए ₹153.55 करोड़ के रिकवरी नोटिस पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि बिना पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर दिए किसी भी कंपनी पर इतनी बड़ी वित्तीय देनदारी नहीं थोपी जा सकती।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद वित्तीय वर्ष 2011-12 और 2012-13 में पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) के तहत हुई बिजली आपूर्ति से जुड़ा है। उस समय जिंदल स्टील ने तय दरों पर बिजली आपूर्ति की थी और भुगतान भी किया गया था।
बाद में 2014 में टैरिफ निर्धारण और ट्रू-अप प्रक्रिया के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने बिजली को “नॉन-फर्म पावर” मानते हुए दर घटाकर ₹1.50 प्रति यूनिट तय कर दी। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने जिंदल स्टील से ₹153.55 करोड़ की रिकवरी का नोटिस जारी किया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि:
- किसी भी निर्णय से जब किसी इकाई पर सीधा वित्तीय असर पड़ता है, तो उसे सुनवाई का अवसर देना जरूरी है
- प्रारंभिक स्तर पर बिना सुनवाई के देनदारी तय करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है
- ऐसी प्रक्रिया से पूरा निर्णय ही प्रभावित हो जाता है
कोर्ट ने 2016 में जारी रिकवरी नोटिस और ओपन एक्सेस रोकने से जुड़े आदेशों को रद्द कर दिया।
आयोग को निर्देश
हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग को निर्देश दिया है कि वह:
- जिंदल स्टील को पूरा सुनवाई का अवसर दे
- मामले की दो महीने के भीतर नई सुनवाई कर पुनः निर्णय ले
अगला कदम क्या होगा?
कोर्ट ने साफ किया है कि जब तक नया निर्णय नहीं आता, तब तक जिंदल स्टील के खिलाफ किसी भी प्रकार की वसूली या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।
निष्कर्ष
यह फैसला प्राकृतिक न्याय और सुनवाई के अधिकार को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। फिलहाल जिंदल स्टील को बड़ी राहत मिली है, लेकिन अंतिम फैसला नियामक आयोग की नई सुनवाई के बाद ही तय होगा।



