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TMC में ‘घर की लड़ाई’ तेज: कल्याण बनर्जी ने दीदी को दिया अल्टीमेटम, बोले- अभिषेक या वफादारों में चुनिए

कोलकाता, 11 जून 2026। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों गंभीर अंदरूनी संकट से गुजरती नजर आ रही है। पार्टी के भीतर पुराने और नए नेतृत्व के बीच बढ़ती खींचतान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और बागी तेवरों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की चुनौती खड़ी कर दी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी में पिछले कुछ महीनों से पुरानी और नई पीढ़ी के नेताओं के बीच मतभेद लगातार बढ़ रहे हैं। इसका प्रमुख कारण पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का बढ़ता प्रभाव माना जा रहा है। अभिषेक को ममता बनर्जी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है, लेकिन उनके बढ़ते कद से कई वरिष्ठ नेता स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

हालिया विवाद तब और गहरा गया जब वरिष्ठ सांसद और अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी से जुड़े एक मामले में कानूनी प्रतिनिधित्व करने से इनकार कर दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि अभिषेक का व्यवहार अहंकारी है और वह इसे स्वीकार नहीं कर सकते। इतना ही नहीं, उन्होंने ममता बनर्जी से वफादार नेताओं और अभिषेक समर्थक खेमे के बीच स्पष्ट निर्णय लेने की बात भी कही।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, पार्टी में असंतोष केवल नेतृत्व परिवर्तन तक सीमित नहीं है। टिकट वितरण, संगठनात्मक फेरबदल और निर्णय लेने की प्रक्रिया में पुराने नेताओं की भूमिका कम होने से भी नाराजगी बढ़ी है। कई नेताओं का मानना है कि दशकों से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं को पर्याप्त सम्मान नहीं मिल रहा है।

इस बीच चुनावी रणनीति और संगठनात्मक फैसलों में पेशेवर सलाहकारों की बढ़ती भूमिका भी विवाद का विषय बनी हुई है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता आरोप लगा रहे हैं कि जमीनी अनुभव की जगह डेटा और सर्वे आधारित फैसलों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे संगठन के पुराने स्तंभ खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और कई नेताओं पर कानूनी दबाव ने भी पार्टी के भीतर असुरक्षा की भावना को बढ़ाया है। ऐसे माहौल में कुछ नेता अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नए विकल्प तलाशते दिखाई दे रहे हैं।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ममता बनर्जी पार्टी के भीतर उभर रहे इस असंतोष को कैसे नियंत्रित करेंगी। यदि समय रहते पुराने नेताओं और नए नेतृत्व के बीच संतुलन नहीं बनाया गया, तो यह अंदरूनी संघर्ष आने वाले समय में TMC के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है। :::

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Manish Tiwari

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