अबूझमाड़ के ईरपानार में पहली बार जली बिजली: दशकों का अंधेरा खत्म, गांव में आई नई रोशनी

रायपुर, 25 अप्रैल 2026 / नक्सल समस्या के दूर होने के साथ बस्तर क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। पहली बार दूरस्थ गांवों तक बिजली पहुँचने से अंधकार और भय कम हुआ है, जीवन स्तर में सुधार आया है और विकास को नई गति मिली है, जो बस्तर के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की ओर संकेत करता है। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिला के अबूझमाड़ क्षेत्र का ग्राम ईरपानार दशकों के अंधेरे के बाद पहली बार बिजली की रौशनी से जगमगा उठा है।
यह विकास राज्य सरकार की नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत संभव हुआ है, जिसका उद्देश्य बस्तर के दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है। बिजली आने से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। अब वे मोबाइल चार्ज, पंखे चलाना और रात के समय सुरक्षित जीवन जी सकेंगे।
कभी नक्शे पर नाम भर रह गया ईरपानार आज उम्मीदों की नई पहचान बन गया है। अबूझमाड़ के घने जंगलों, ऊंचे पहाड़ों और दुर्गम पगडंडियों के बीच बसे इस छोटे से गांव में पहली बार बिजली पहुँची है। वर्षों तक अंधेरे में जीवन गुजारने वाले ग्रामीणों के घरों में जब पहली बार बल्ब जले, तो गांव ने सिर्फ उजाला नहीं देखा, बल्कि विकास को महसूस किया।
ईरपानार के अलावा, बस्तर संभाग के अन्य नक्सल प्रभावित इलाकों जैसे बीजापुर के चिल्कापल्ली (जनवरी 2025) और तेमिनार (मार्च 2025) में भी हाल के समय में बिजली पहुंची है, जो विकास के नए अध्याय की शुरुआत है। इन क्षेत्रों में नियद नेल्ला नार योजना के तहत तेजी से सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
ईरपानार नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है, लेकिन यहां तक पहुंचना बेहद कठिन है। कच्चे रास्ते, पहाड़ी चढ़ाई, घने जंगल और कई स्थानों पर पैदल सफर इस यात्रा को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। बरसात के मौसम में स्थिति और भी कठिन हो जाती है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिशन मोड में कार्य कर इस चुनौती को पार किया।
घने जंगलों के बीच चला विकास अभियान
कलेक्टर नारायणपुर ने बताया कि ईरपानार विद्युतीकरण सामान्य कार्य नहीं था। बिजली खंभे, तार और अन्य सामग्री पहुंचाने के लिए कठिन श्रम करना पड़ा। कई स्थानों पर मशीनों के बजाय मानव श्रम और स्थानीय सहयोग से काम पूरा किया गया।
56.11 लाख की लागत लेकिन असर पीढ़ियों तक
ग्राम ईरपानार विद्युतीकरण कार्य पर कुल 56.11 लाख रुपये की लागत आई। इस परियोजना के तहत गांव के परिवारों को पहली बार विद्युत कनेक्शन प्रदान किया गया। यह उस सोच का प्रतीक है, जिसमें अंतिम छोर पर बसे व्यक्ति को भी विकास का समान अधिकार दिया जा रहा है।
अब बच्चों के सपनों को मिलेगा उजाला
बिजली आने से अब गांव के बच्चों को रात में पढ़ाई के लिए रोशनी मिलेगी। मोबाइल चार्जिंग, पंखे, लाइट और छोटे घरेलू उपकरणों से जीवन आसान होगा। भविष्य में डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, संचार सुविधाएं और रोजगार के अवसर भी विकसित होंगे।
ग्रामीणों की आंखों में दिखी खुशी
जब पहली बार गांव में बल्ब जले, तो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर चेहरे पर उत्साह दिखाई दिया। कई ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने पहली बार अपने घरों में स्थायी रोशनी देखी है। वर्षों से लालटेन और लकड़ी पर निर्भर जीवन अब बदल रहा है।
अबूझमाड़ में बदलाव की नई शुरुआत
अबूझमाड़ क्षेत्र के हांदावाड़ा गांव में भी हाल के महीनों में पहली बार बिजली पहुंची है। ईरपानार जैसे अन्य दूरस्थ गांवों को भी प्राथमिकता के आधार पर बिजली, सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।
➡️ यह पहल बस्तर में विकास की नई रोशनी बनकर उभर रही है, जहां अब अंधेरे की जगह उम्मीद और अवसर ने ले ली है।



