CSMCL ओवरटाइम घोटाला: EOW/ACB की बड़ी कार्रवाई, 07 आरोपी गिरफ्तार, ₹115 करोड़ भुगतान में फर्जीवाड़े का खुलासा

रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में सामने आए ओवरटाइम भुगतान घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) रायपुर ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 07 मैन पावर एजेंसियों के संचालक/प्रतिनिधियों को गिरफ्तार किया है।
यह कार्रवाई अपराध क्रमांक 44/2024 के तहत की गई, जिसमें आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(बी), 8 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 471 एवं 120-बी के तहत मामला दर्ज है।
₹115 करोड़ के भुगतान में गंभीर अनियमितता
विवेचना में सामने आया है कि वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवरटाइम भुगतान के नाम पर मैन पावर एजेंसियों को लगभग ₹115 करोड़ का भुगतान किया गया। जांच में यह तथ्य प्रथम दृष्टया पाया गया कि इस भुगतान में फर्जी एवं बढ़े हुए बिल तैयार कर शासकीय राशि का अवैध आहरण किया गया।
कमीशन के रूप में वितरण का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, ओवरटाइम भुगतान की यह राशि वास्तविक रूप से कर्मचारियों तक नहीं पहुंची। इसके बजाय इसका उपयोग CSMCL के कुछ अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को कमीशन देने में किया गया, जबकि बड़ी राशि एजेंसियों ने स्वयं रख ली।
गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं—
- नीरज कुमार चौधरी (वित्त एवं कर सलाहकार)
- अजय लोहिया (डायरेक्टर, अलर्ट कमांडोज प्रा. लि.)
- अजीत दरंदले (डायरेक्टर, सुमीत फैसिलिटिज कंपनी)
- अमित प्रभाकर सालुंके (डायरेक्टर)
- अमित मित्तल (चेयरमेन एवं डायरेक्टर, ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड)
- राजीव द्विवेदी (डायरेक्टर, प्राइमवन वर्कफोर्स प्रा. लि.)
- संजीव जैन (डायरेक्टर, प्राइमवन वर्कफोर्स प्रा. लि.)
ईडी की कार्रवाई और शुरुआती इनपुट
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 29 नवंबर 2023 को 03 व्यक्तियों से ₹28.80 लाख नकद जब्त किए थे और जानकारी राज्य शासन को भेजी थी, जिसके आधार पर EOW/ACB ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
फर्जी बिल और संगठित आर्थिक अपराध का शक
जांच में यह भी पाया गया कि मैन पावर एजेंसियों द्वारा ओवरटाइम कार्य के नाम पर वास्तविक उपस्थिति और भुगतान से जुड़ी पारदर्शिता नहीं रखी गई। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बिलिंग कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
एजेंसियों द्वारा प्राप्त राशि का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों को भुगतान करने के बजाय अधिकारियों एवं निजी व्यक्तियों के बीच कमीशन के रूप में वितरित किया गया, जिससे संगठित आर्थिक अपराध की आशंका मजबूत हुई है।
न्यायालय में पेशी और आगे की जांच
गिरफ्तार सभी आरोपियों को विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 11 मई 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। रिमांड अवधि में फर्जी बिलिंग, कमीशन नेटवर्क और अन्य लाभार्थियों की भूमिका को लेकर गहन पूछताछ की जाएगी।
EOW/ACB ने संकेत दिए हैं कि आगे की जांच में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।



