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बीजापुर एनकाउंटर से पहले माओवादियों का बड़ा बयान: पांचवीं बार शांति वार्ता की पेशकश, केंद्र पर साधा निशाना, अमित शाह से मांगा जवाब, बोले– 7 लाख जवानों की घेराबंदी में कैसे हो बैठक?

जगदलपुर। बीजापुर में चलाए गए एंटी नक्सल ऑपरेशन पर सीआरपीएफ के डीजी और छत्तीसगढ़ के डीजीपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले माओवादी संगठन ने प्रेस नोट जारी कर केंद्र और राज्य सरकार से एक बार फिर शांति वार्ता की अपील की है। माओवादी संगठन की केंद्रीय कमेटी के प्रवक्ता अभय ने कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वह शांति वार्ता के लिए तैयार है या नहीं। उन्होंने बताया कि यह शांति वार्ता की माओवादियों की पांचवीं अपील है।

प्रवक्ता अभय ने कहा कि इस मुद्दे पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की स्पष्ट प्रतिक्रिया आनी चाहिए, जिससे स्थिति स्पष्ट हो सके। अभय ने यह भी दावा किया कि कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर 26 माओवादी मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि संगठन शांति वार्ता के लिए तैयार है और मुख्यधारा में आने की इच्छा रखता है, लेकिन माओवादी क्षेत्रों में सात लाख से अधिक सुरक्षाबलों की तैनाती के चलते संगठन बैठकें तक नहीं कर पा रहा है।

तेलंगाना की प्रतिक्रिया सराहनीय, केंद्र और छत्तीसगढ़ पर जताई चिंता

प्रेस नोट में प्रवक्ता अभय ने बताया कि 25 अप्रैल को माओवादी संगठन ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की थी कि जनसमस्याओं के स्थायी समाधान के लिए एक समय सीमा तय कर युद्धविराम की घोषणा करते हुए शांति वार्ता शुरू की जाए। इस पर तेलंगाना सरकार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, लेकिन केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिक्रिया निराशाजनक रही।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री बंडी संजय और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने साफ कर दिया कि युद्धविराम का कोई सवाल ही नहीं उठता और हथियार डाले बिना शांति वार्ता संभव नहीं है। अभय ने आरोप लगाया कि विजय शर्मा द्वारा पहले बिना शर्त वार्ता की बात कही गई थी, लेकिन अब सरकार माओवादियों को हथियार छोड़ने की शर्त थोप रही है, जो वार्ता की भावना के विपरीत है।

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Manish Tiwari

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