बगिया एम-कैड योजना से 4933 हेक्टेयर में सिंचाई : जशपुर बनेगा आधुनिक दाबित इरिगेशन का राष्ट्रीय मॉडल जिला

रायपुर, 1 मई 2026/ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के गृह ग्राम बगिया में समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना के अंतर्गत बगिया दाबित उद्वहन सिंचाई प्रणाली के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू तथा कृषि मंत्री रामविचार नेताम सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बगिया समृद्धि एम-कैड योजना केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि “हर बूंद से अधिक उत्पादन” की सोच का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से जशपुर जिला देश में आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली का मॉडल बनेगा और किसानों को समृद्धि की नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने बताया कि पारंपरिक नहर प्रणाली के स्थान पर अब प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा। भूमिगत पाइपलाइन व्यवस्था से जल अपव्यय रुकेगा, जल उपयोग दक्षता बढ़ेगी और भूमि अधिग्रहण की समस्या समाप्त होगी। इससे वर्षा पर निर्भर किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परियोजना कृषि को तकनीक आधारित, टिकाऊ और लाभकारी बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। इससे जशपुर को राष्ट्रीय स्तर का एग्री-इरीगेशन मॉडल जिला बनने का अवसर मिलेगा और किसानों की आय में स्थायी सुधार होगा।
यह परियोजना कांसाबेल विकासखंड के बगिया क्लस्टर में मैनी नदी पर बगिया बैराज सह दाबित उद्वहन सिंचाई योजना के माध्यम से लागू की जा रही है। इसके तहत 13 गांवों—बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड एवं ढुढुडांड—के लगभग 4933 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।
साय ने बताया कि देश के 23 राज्यों की 34 एम-कैड परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ का बगिया क्लस्टर एकमात्र चयनित परियोजना है। इसके लिए भारत सरकार ने 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जबकि कुल लागत लगभग 119 करोड़ रुपये है।
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि यह योजना क्षेत्र के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी और किसानों को स्थायी आय का आधार देगी। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने इसे किसानों के लिए “आने वाले समय का वरदान” बताया।
स्टेट नोडल ऑफिसर आलोक अग्रवाल ने बताया कि एम-कैड कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में अप्रैल 2025 में हुई थी। परियोजना को 6 माह में पूर्ण करने का लक्ष्य है। इसके संचालन की जिम्मेदारी प्रारंभ में 5 वर्षों तक ठेकेदार के पास रहेगी, उसके बाद इसे जल उपभोक्ता समिति को सौंपा जाएगा, जिसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी होगी।
परियोजना में सौर ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति, SCADA प्रणाली और IoT तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इससे जल का वैज्ञानिक एवं नियंत्रित उपयोग सुनिश्चित होगा और जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों से निपटने की क्षमता भी बढ़ेगी।



