अमरकंटक से भोरमदेव तक 151 किमी कांवड़ यात्रा: नदी-पहाड़ और जंगल पार कर भावना बोहरा के साथ 600 कांवड़ियों के कदम बढ़े

पंडरिया, 11 अगस्त 2026
सावन मास की पवित्रता और भगवान भोलेनाथ की भक्ति के साथ पंडरिया विधायक भावना बोहरा द्वारा माँ नर्मदा मंदिर, अमरकंटक से भोरमदेव मंदिर तक निकाली जा रही 151 किलोमीटर की कांवड़ पदयात्रा दूसरे दिन भी पूरे उत्साह और आस्था के साथ जारी रही। यात्रा के दूसरे दिन ग्राम लमनी से वन ग्राम महामाई (खुड़िया) तक कांवड़ियों के साथ पदयात्रा करते हुए भावना बोहरा ने छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, शांति, खुशहाली एवं सर्वमंगल की कामना की।
यात्रा के दौरान नदी, पहाड़ों, पथरीले रास्तों और घने जंगलों जैसे कठिन मार्गों को पार करते हुए कांवड़ियों के कदम लगातार आगे बढ़ते रहे। ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से पूरा मार्ग शिवमय नजर आया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद कांवड़ियों में उत्साह और उमंग कम होने के बजाय और अधिक बढ़ता गया। 10 अगस्त से 16 अगस्त तक इस कांवड़ पदयात्रा के प्रथम दिन माँ नर्मदा मंदिर अमरकंटक से ग्राम लमनी तक विधायक भावना बोहरा के साथ लगभग 600 कांवड़ियों ने यात्रा पूरी की और आज दूसरे दिन प्रातः ही कांवड़ की पूजा कर यात्रा वन ग्राम महामाई (खुड़िया) में संपन्न हुई।

इस अवसर पर विधायक भावना बोहरा ने कहा कि यह यात्रा मेरे लिए केवल 151 किलोमीटर की पदयात्रा नहीं, बल्कि आस्था, संकल्प, साधना और जनकल्याण की भावना से जुड़ी एक आध्यात्मिक यात्रा है। माँ नर्मदा के पावन उद्गम स्थल से भोरमदेव धाम तक का यह मार्ग हमें प्रकृति, संस्कृति और सनातन आस्था से जोड़ रहा है।
“पहाड़ हों, पथरीले रास्ते हों या घने जंगल, महादेव की भक्ति में उठाया गया हर कदम हमें आगे बढ़ने की शक्ति देता है। यात्रा के कठिन रास्तों ने हमारे शरीर की परीक्षा जरूर ली है, लेकिन हर पड़ाव के साथ हमारा उत्साह दोगुना और विश्वास और अधिक प्रबल हुआ है। कांवड़ियों के साथ मिल रहा जनस्नेह और ‘बोल बम’ का जयघोष हमारी ऊर्जा को लगातार बढ़ा रहा है।

सावन के इस पवित्र अवसर पर भगवान भोलेनाथ और माँ नर्मदा से पूरे छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, किसानों की खुशहाली, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य, माताओं-बहनों के सम्मान और प्रत्येक परिवार के मंगलमय जीवन की प्रार्थना करते हुए हमारी यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है।”
भावना बोहरा ने कहा कि घने वनों के बीच बहती शीतल हवाएं, चारों ओर हरियाली और वनांचल की शांत वादियों के बीच ऐसा लग रहा जैसे प्रकृति स्वयं इस आध्यात्मिक यात्रा में साथ चलकर आशीर्वाद दे रही हो। कठिन राह, दुर्गम रास्ते और लंबी यात्रा के बावजूद सभी कांवड़ियों के मन में उत्साह और कदमों में ऊर्जा बनी रही। माँ नर्मदा के पावन जल और भोलेनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा ने हर कठिनाई को सहज बना दिया।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि माँ नर्मदा की कृपा और भगवान महादेव के आशीर्वाद से यह यात्रा निर्विघ्न पूर्ण होगी और भोरमदेव धाम में जलाभिषेक के साथ छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास एवं सर्वमंगल का संकल्प और अधिक मजबूत होगा।



